सरकारी शालाओं ने मारी इस बार बाजी

 

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। बुधवार को माध्यमिक शिक्षा मण्डल ने कक्षा दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिये। जिले के अनेक विद्यार्थियों ने प्रदेश की टॉप टेन सूची में स्थान पाकर जिले को गौरवांवित किया है। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश विद्यार्थी सरकारी शालाओं से हैं।

दसवीं और बाहरवीं का परीक्षा परिणाम आते ही सोशल मीडिया पर बधाईयों का सिलसिला आरंभ हो गया। जिला प्रशासन के द्वारा भी इन होनहार विद्यार्थियों का सम्मान किया जाकर इनका हौसला बढ़ाया गया।

कलेक्टर बनना चाहती हैं दृष्टि : पूरे प्रदेश में प्रथम आने पर बुधवार को शासकीय उत्कृष्ट स्कूल की छात्रा दृष्टि सनोडिया का सम्मान जिला कलेक्टर प्रवीण अढ़ायच के द्वारा किया गया। कला संकाय में 479 अंक लाकर पूरे प्रदेश में वे अव्वल आयीं हैं। कलेक्टर के हाथों सम्मानित होने वाली दृष्टि खुद आईएएस सेवाओं में जाकर कलेक्टर बनना चाहतीं हैं।

दृष्टि का कहना है कि वे परीक्षा के दिनों में पढ़ने वाली छात्रा नहीं हैं। दृष्टि का कहना है कि वे जुलाई से ही प्रतिदिन कम से कम तीन घण्टे की पढ़ाई करतीं थीं, परीक्षा के दिनों में जरूर यह समय बढ़ गया। शिक्षक की पुत्री दृष्टि का कहना है कि उन्होंने कोंिचग की बजाय खुद के द्वारा पढ़ाई किये जाने को ज्यादा महत्व दिया।

दृष्टि कहतीं हैं कि आरंभ से ही हर विषय को समझने की उन्होंने कोशिश की। किसी तरह की शंका होने पर स्कूल में ही शिक्षक से सारे डाउट क्लियर किये। उत्कृष्ट स्कूल में ही शिक्षक के पद पर कार्यरत दृष्टि के पिता शिवशंकर सनोडिया, बेटी की इस सफलता से अभिभूत हैं।

दृष्टि के पिता ने कहा कि हर साल स्कूल में दूसरे बच्चों को प्रथम, दितीय आते देखकर उन्हें लगता था कि उनकी बेटी भी इस तरह प्रथम स्थान लाती, जिसे आज बेटी ने साकार कर दिखाया। उन्होंने बताया कि 11 बजे के बाद से ही घर में लगातार फोन आने का सिलसिला जारी है।

उन्होंने कहा कि रिश्तेदार, दोस्त फोन करके दृष्टि को बधाईयां दे रहे हैं। दृष्टि की माँ का कहना है कि बेटी जब देर रात तक पढ़ती तो उसे उन्हंे चाय बनाकर देनी पड़ती थी। वैसे पूरे प्रदेश में प्रथम आने वाली दृष्टि अपने अंकों को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें उम्मीद थी कि इससे अधिक अंक आने चाहिये थे। दृष्टि आगे पढ़कर भारतीय प्रशासनिक सेवा की सेवाओं में जाकर कलेक्टर बनना चाहतीं हैं।

समय का महत्व समझें विद्यार्थी : जिले में कक्षा दसवीं में प्रथम स्थान पाने वाले अश्वनी दुबे अपने परिणाम को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। अश्वनी का कहना है कि उन्हें अब समझ आ रहा है कि एक अंक का क्या महत्व होता है।

अश्वनी दुबे ने बताया कि उन्होंने एक पर्चे में एक अंक के सवाल पर ज्यादा महत्व नहीं दिया और जल्दबाजी कर दी नहीं तो उनका नाम प्रदेश की प्रावीण्य सूची में होता है। अश्वनी आईआईटी की तैयारी करना चाहते हैं। उनका कहना है कि स्कूल की पढ़ाई और सेल्फ स्टडी से वे इस मकाम पर पहुँचे हैं।

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