उपेक्षित पड़ी पुण्य सलिला!

 

 

(शरद खरे)

जिले से उदगमित पुण्य सलिला बैनगंगा नदी देश में न जाने कितने जिलों के निवासियों की जीवन रेखा मानी जाती है। इस नदी के उदगम से लेकर एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के भीमगढ़ बाँध तक के हिस्से में यह पूरी तरह उपेक्षित ही प्रतीत होती है। हर साल फरवरी माह में ही यह सूखने की कगार पर जा पहुँचती है।

बैनगंगा नदी का उदगम जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा में मुण्डारा है। मुण्डारा गाँव के पास स्थित रजौलाताल से बैनगंगा नदी एक कुण्ड से निकलती है। यह नदी सिवनी की अर्द्ध परिक्रमा करती हुई पहले उत्तर में फिर पूर्व की ओर तत्पश्चात दक्षिणी पूर्वी दिशा में बहती है।

इसका प्रारंभिक बहाव क्षेत्र चट्टानी है, परन्तु फिर उपजाऊ मैदान तथा संकरी घाटियों से होकर बहते हुए यह नदी दिघौरी, बण्डोल छपारा से होते हुए सीधे छपारा के भीमगढ संजय सरोवर बाँध जो कि एशिया का सबसे बडा मिट्टी का बाँध हैँ से जल भराव के बाद मझगंवा, केवलारी से बालाघाट जिला होते हुए भण्डारा तथा चाँदा जिले से बहती हुई वर्धा नदी में मिलती है। इन दोनों के संगम के बाद नदी का नाम प्राणहिता हो जाता है। कन्हान नदी, बावनथड़ी नदी तथा पेंच नदी इसकी सहायक नदियां मानी जाती हैं। आगे जाकर यह नदी गोदावरी नदी में मिल जाती है। इस प्रकार बैनगंगा नदी गोदावरी नदी की सहायक नदी है। यह लगभग 569 किलोमीटर अर्थात लगभग 354 मील का सफर तय करती है।

विडंबना ही मानी जायेगी कि सिवनी में न तो प्रशासनिक और न ही सियासी तौर पर इस नदी को जीवन दान देने के प्रयास किये गये हैं। पूर्व में पदस्थ रहे जिला कलेक्टर जय नारायण शर्मा के द्वारा 1993 में बैनगंगा के उदगम स्थल की साफ सफाई करवाने का प्रयास गया था। इसके बाद धनराजू एस. के द्वारा भी कुछ हद तक इसकी सुध ली गयी थी।

देखा जाये तो बैनगंगा नदी की तलहटी सहित भीमगढ़ बाँध की तलहटी में भी हर साल गाद (सिल्ट) जमा हो जाती है। इस सिल्ट को निश्चित अंतराल में साफ कराना चाहिये। हो सकता है कि सिंचाई विभाग के द्वारा हर साल कागजों पर इसे साफ भी कराया जाता हो, पर फरवरी माह के बाद जब नदी में जल प्रवाह जिस तरह से कम हो जाता है उसे देखकर इस बात में संशय ही दिखता है कि हर साल नदी या बाँध से सिल्ट निकाली जाती हो!

इस नदी के अस्तित्व को बचाने के लिये प्रशासनिक स्तर पर पहल की आवश्यकता है। सांसद और विधायकों को चाहिये कि वे अपनी-अपनी निधि से बैनगंगा सहित अन्य नदियों में कुछ-कुछ दूरी पर गुणवत्ता वाले स्टॉप डेम बनवायें ताकि बारिश में बहने वाले जल को रोका जा सके। अगर ऐसा किया जाता है तो जिले भर के किसानों को नदियों के आसपास ही साल भर पानी मुहैया हो सकेगा और ग्राउंड लेवल वाटर भी रिचार्ज हो सकेगा।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि अभी गर्मी के मौसम में ही बैनगंगा सहित अन्य नदियों सहित तालाबों, बाँध विशेषकर भीमगढ़ बाँध की तलहटी से सिल्ट निकलवाने की कार्ययोजना को तैयार कर समय सीमा में इसका क्रियान्वयन कराया जाये ताकि भविष्य में जिले में पानी की समस्या से निपटा जा सके।

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