समर कैंप में खिले बच्चों के चेहरे

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। विद्यार्थी जीवन हमारी जिंदगी का सबसे सुनहरा समय होता है। इसलिये विद्यार्थी जीवन का एक-एक श्वास का सदुपयोग अपने भविष्य को सवांरने के लिये करना चाहिये। इससे ही जीवन को सफलता प्राप्त होगी।

उक्ताशय के उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सिवनी द्वारा 09 से 15 मई तक विद्यार्थियों के लिये आयोजित समर कैंप के समापन अवसर पर वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी ने विद्यार्थी जीवन सबसे उत्तम जीवन विषय पर व्यक्त किये।

उन्होंने आगे कहा कि समय बहुत मूल्यवान होता है, जो इसके महत्व को समझता है उसका जीवन मूल्यवान बन जाता है। इस दुनिया में जो भी महान पुरुष हुए है वह अपने समय के एक-एक मिनिट का हिसाब रखते हैं। उन्होंने बच्चों को अपने समय का सही उपयोग करने के लिये प्रतिदिन की दिनचर्या बनाने का सुझाव दिया और कहा कि हमें हरेक कार्य का समय निश्चित कर लेना चाहिये ताकि हमें पता रहे कि कब पढ़ना है, और कब खेलना तथा कितनी देर तक खेलना है।

उन्होंने कहा कि पढ़ने के लिये सुबह का समय बहुत अच्छा होता है क्योंकि उस समय हमारा दिमाग पूरी तरह से ताज़गी से भरा रहता है। इसलिये सुबह का पढ़ा हुआ विषय हमें अच्छी तरह से याद रहता है। इसके बाद सुबह के पढ़े हुए चेप्टर को सारे दिन में जब भी समय मिले दोहराने का अभ्यास करना चाहिये।

उन्होंने कहा कि इस कैंप में बच्चों को याद करने के सरल और सहज तरीके सिखलाये गये साथ ही साथ एकाग्रता बढ़ाने के लिये भिन्न – भिन्न गेम्स कराये गये। डायलॉग, संगीत, नृत्य के द्वारा बच्चों में दबी हुई कलाओं का विकास कैसे हो, आदि टिप्स बताये गये।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रघुनंदन बघेल टेलीकॉम डिस्ट्रिक्ट इंजीनियर ने कहा कि आज डॉक्टर, इंजीनियर बनना आम बात है, लेकिन हमें एक आदर्श डॉक्टर, इंजीनियर बननंे का लक्ष्य रखना चाहिये, हम अध्ययन अपनी चहुंमुखी विकास के लिये करंे। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित यह समर कैंप निश्चित ही बच्चों को उनके आदर्श भविष्य बनाने में लाभकारी होगा, संस्थान द्वारा बच्चों के बौद्धिक विकास के लिये किये जा रहे प्रयास अत्यंत ही सराहनीय है।

वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका रामेश्वरी दीदी ने कहा कि सात दिनों तक बच्चों ने अपने अंदर की दबी कलाओं को पहचानकर बहुत खुश दिखायी दे रहे हैं। उन्होंने ने कहा कि बच्चों को सिखाने का सबसे ज्यादा उत्तर दायित्व माँ का होता है। वह बच्चों के संस्कारों को अच्छी तरह पहचानती है। बच्चे किस मेनर्स के साथ क्या बोले, बच्चों का व्यवहार दूसरों के प्रति कैसा हो, आदि संस्कार एक माँ ही सिखा सकती है। उपस्थित अभिभावकों की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि माता – पिता जो करते हैं वही बच्चे सीखते है। इसलिये प्रत्येक माता – पिता को आध्यात्मिकता और भौतिकता में बैलेंस बनाने की कला आनी चाहिये।

आशीर्वचन के रुप में कार्यक्रम में उपस्थित जिला संस्थान प्रभारी राजयोगिनी ज्योति दीदी ने कहा कि इस सप्त दिवसीय समर कैंप में बच्चों ने जो कुछ सीखा है उसे सालभर जीवन में उतारना भी है। बच्चों का जीवन गीली मिट्टी के समान होता है, जिसे संवारने का काम स्वयं की शिक्षिका के रुप में उनके माता – पिता का होता हैं। प्रत्येक माता – पिता को बच्चों में बौद्धिक विकास के साथ चहुंमुखी विकास के बारे में सोचना चाहिये। माता पिता यह न सोचें कि बच्चे यदि आध्यात्मिकता से जुड़ जायेंगे तो वह चहंुमुखी विकास नहीं कर पायेंगे, यह सोचना गलत है। आध्यात्मिकता को बचपन से अपनाने से ही बच्चों का चहुंमुखी विकास हो पायेगा। आध्यात्मिकता से जुड़ने से संस्कारवान बनते हैं, न कि साधु सन्यासी।

अंत में विभिन्न प्रतियोगिता में सफल हुए बच्चों को पुरुस्कार वितरण किया गया एवं कैंप में सम्मिलित सभी बच्चों को संस्थान की ओर से प्रमाण पत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मेजर पेर सिंह बघेल ने मंचासीन अतिथि एवं उपस्थित अभिभावक गणों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्माकुमारी आस्था दीदी द्वारा किया गया।

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