मोदी के आने पर माँस का निर्यात बढ़ा: शंकराचार्य

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। भारतीय जीवन में गाय का बड़ा महत्व है। पहले हर गाँव में गौशाला रहती थी, लेकिन आज भारत गौ माँस का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।

उक्त आशय की बात स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कही। वे शुक्रवार 17 मई को दिघौरी में प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले चुनाव में कहा था कि यूपीए के जमाने में भारत गौ माँस का निर्यात करता है जिससे उनका हृदय जल रहा है, आपका जलता है कि नहीं यह नहीं जानता हूँ। लोगों ने यह उम्मीद लगायी थी कि जब मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे तो गौ माँस का निर्यात बंद हो जायेगा लेकिन माँस का निर्यात और बढ़ गया। यहाँ तक कि गाय को काटने के लिये जो मशीनें विदेशों से आती हैं उसकी सब्सिडी बढ़ा दी गयी।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति, किसान, ग्रामीण के घर गाय पालता था। अब गाय देखने को नहीं मिलती है। इसका परिणाम यह है कि गोबर की खाद की जगह अब हम जो भोजन कर रहे हैं वह रासायनिक खाद की देन है। हर चीज में मिलावट है। ईमानदारी खत्म हो चुकी है। इस पर किसी ने कोई चर्चा नहीं की है जबकि यह सबसे ज्यादा आवश्यक था। हमारे शरीर में 70 प्रतिशत पानी है, आज पानी भी ठीक नहीं है। गाँव – गाँव में शौचालय तो बना दिये गये, लेकिन पानी नहीं है। इससे गंदगी और फैल रही है। शौचालय का गंदा पानी तालाब, नदियों में जा रहा है। दूषित पानी बोरिंग में पहुँच रहा है। वहीं विकास की बात जो करते हैं लेकिन विकास जिनके लिये है उसकी बात नहीं करते हैं।

आयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राम मंदिर मुद्दा अदालत में अटका हुआ है। हम लोग इस मामले को लेकर कोर्ट भी गये और हमने भाजपा के लोगों से शिलान्यास की बात की लेकिन इस मामले को लेकर वह मौन हो गये क्योंकि वह चाहते हैं कि श्रीराम मंदिर मामले को लेकर अध्यक्ष आरएसएस का बनाया जाये और इस मामले को लेकर वह अपने अनुसार काम करें जबकि हमारा उद्देश्य है कि हम सभी को लेकर इस मामले में अपनी बात रखें, जिससे विवाद खत्म हो सके।

राजनीति में धर्म और राष्ट्रवाद को लेकर हो रही राजनीति के प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि हमने जो कुछ किया वह राष्ट्र के लिये किया है और इसमें किसी प्रकार से मतभेद नहीं है लेकिन लोग राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुधाम के विकास को लेकर अगर शासन कुछ नही करता तो हम यहाँ पर अच्छे संस्कृत महाविद्यालय एवं अनेक ऐसी कार्ययोजना बनाना चाहते हैं, जिससे जिले के लोग संस्कारवान हों और जिले का विकास कर सकें।