कृतज्ञ हैं या कृतघ्न हैं हम!

 

 

हम फिर शर्मिंदा हुए . . . 02

(लिमटी खरे)

भारत गणराज्य की स्थापना के साथ ही 01 नवंबर 1956 को देश का हृदय प्रदेश (मध्य प्रदेश) अस्तित्व में आया। इसके साथ ही सिवनी जिला भी मध्य प्रदेश के मानचित्र पर आकार ले सका। आज़ादी के उपरांत सिवनी में विकास की इबारत किसने लिखी है, इस प्रश्न को अगर जिले के निवासियों से किया जाये तो सभी एक सुर से सुश्री विमला वर्मा के नाम का उल्लेख करेंगे।

इसका कारण यह है कि आज़ादी के उपरांत सिवनी जिले में विकास के नाम पर जो भी सौगातें दी गयी हैं उनमें से निन्यानबे फीसदी से ज्यादा सौगातें सुश्री विमला वर्मा के कारण ही सिवनी को मिल पायी हैं। उमर दराज हो रही पीढ़ी सुश्री विमला वर्मा को कुशल प्रशासक और प्रौढ़ हो रही पीढ़ी उन्हें सिवनी के विकास का भागीरथी ही मानती है, यह कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

सिवनी के पहले कॉलेज़ (शिखर चंद जैन महाविद्यालय) में उनके द्वारा अध्यापन का कार्य भी कुछ समय तक किया गया है। विमला वर्मा से जुड़े अनेक किस्से हैं, जो लोग गाहे बेगाहे याद कर लिया करते हैं। जब तक विमला बुआ सक्रिय राजनीति में रहीं तब तक उनके द्वारा यही प्रयास किया गया कि सिवनी की झोली में कुछ न कुछ सौगातें अवश्य डाली जायें।

विमला बुआ के गुस्से से लोग, राजनेता, अधिकारी भयाक्रांत ही रहा करते थे। उनकी सोच में दूरंदेशी थी। एक बार विमला बुआ ने चर्चा के दौरान बताया था कि 1975 के आसपास जब इंदिरा गाँधी जिला अस्पताल (उस वक्त का जिला अस्पताल) के नये भवन का काम बारापत्थर में आरंभ कराया गया था तब लोगों ने उनसे यह कहकर अपना विरोध जताया था कि शहर के बाहर उपचार के लिये कौन जायेगा।

उन्होंने बताया था कि लोगों का कहना था कि बस स्टैण्ड और कोतवाली के बीच जिस स्थान पर उस समय अस्पताल का संचालन किया जाता था वहीं नये अस्पताल का भवन तैयार कराया जाये। वे बतातीं थीं कि जिस स्थान पर अस्पताल संचालित होता था उसका रकबा बहुत ही छोटा था और वे चाहतीं थीं कि सिवनी का जिला अस्पताल संभाग में सबसे बड़ा अस्पताल बने। आज जिला चिकित्सालय लोगों की पहुँच के दायरे में ही है। वे जानतीं थीं कि शहर का विस्तार होगा और तब यह अस्पताल लोगों के लिये सहूलियत बनेगा। यह अलहदा बात है कि उनके सक्रिय राजनीति से किनारा करने के बाद इस अस्पताल का धनी धौरी भी कोई नहीं रह गया है। सालों से अस्पताल को अभिनव और असफल प्रयोगों के लिये उपयोग में लाया जाने लगा है।

सिवनी में उस समय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय हुआ करता था जब प्रदेश में गिनती के आरटीओ कार्यालय हुआ करते थे। सिवनी में सिंचाई विभाग का मुख्य अभियंता कार्यालय, लोक निर्माण विभाग का अधीक्षण यंत्री कार्यालय, नेशनल हाईवे का कार्यपालन यंत्री कार्यालय, मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम का संभागीय कार्यालय, गर्ल्स कॉलेज़, केवलारी का डाईट, कान्हीवाड़ा में नवोदय विद्यालय, दूध डेयरी, केंद्रीय विद्यालय आदि न जाने कितनी उपलब्धियां हैं जो सुश्री विमला वर्मा के द्वारा सिवनी के हित को देखते हुए यहाँ स्थापित करवाने में महती भूमिका निभायी गयी थी।

सुश्री विमला वर्मा के बाद जिन हाथों में सिवनी का भविष्य आया उनके द्वारा सिवनी में किसी भी तरह की कोई उपलब्धि हासिल करने की बजाय अपनी जड़ें मजबूत करने का प्रयास ही किया गया। हम विपक्ष में हैं, क्या कर सकते हैं! कोई हमारी नहीं सुन रहा है हम क्या करें, जैसे जुमले दो दशकों से सुनायी दे रहे हैं। एक जनप्रतिनिधि के साथ जनता का जनादेश होता है, वह अगर चाहे तो क्या नहीं कर सकता है, पर . . .!

क्या यह बात किसी के गले उतर सकती है कि जिस महिला ने अपना सारा जीवन सिवनी के विकास के लिये समर्पित कर दिया हो, सिवनी के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिये विशालकाय जिला अस्पताल बनवाया हो, उसी विमला वर्मा की पार्थिव देह को महज सात आठ लोगों की उपस्थिति में अस्पताल से बाहर लाया जाये और स्ट्रेचर को ढकेलने के लिये भी अस्पताल के कर्मचारियों की बजाय उनके परिजनों को ही संघर्ष करना पड़ा हो! अस्पताल के एक भी कर्मचारी या अधिकारी ने शिष्टाचार के नाते उनके पार्थिव शरीर को बिदाई देना भी मुनासिब नहीं समझा। यहाँ तक कि उनके पार्थिव शरीर को सरकारी एंबुलेंस की बजाय निजि एंबुलेंस में उनके निवास गिरधर भवन तक ले जाना पड़ा हो। यह वाकई शर्मिंदगी की बात है सिवनी के सियासतदारों और नागरिकों के लिये!

लगभग तीन दशकों तक सिवनी का नाम देश-प्रदेश में धूमकेतू की तरह रोशन करने वालीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा के द्वारा जिले को अनगिनत सौगातें दी गयीं। उनके द्वारा जिले के प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिये स्कॉलरशिप की योजना आरंभ करायी गयी। इसके लिये उनके द्वारा अपने पास के संचित धन से एक ट्रस्ट का गठन किया गया ताकि यह सालों साल तक बिना किसी विघ्न के अनवरत जारी रहे। विमला वर्मा के नाम पर जिले में कुछ भी नहीं है!

इतना सब होने के बाद भी जिले के निवासियों ने उन्हें क्या दिया! उनके द्वारा 1995 में प्रियदर्शनी इंदिरा गाँधी की एक प्रतिमा अपने खर्च पर बनवायी गयी थी ताकि यह प्रतिमा जिला अस्पताल में लग सके। आज ढाई दशक के बाद भी यह प्रतिमा उनके घर पर ही रखी है। सोशल मीडिया पर यह बात उठ रही है कि सिवनी के ट्रामा केयर यूनिट को उनके नाम पर कर दिया जाये तो कुछ का मानना है कि सिवनी का मेडिकल कॉलेज़ उनके नाम पर ही आरंभ किया जाये। सुश्री विमला वर्मा काँग्रेस की सदस्य थीं, पर वे दलगत भावना से ऊपर उठकर कार्य करतीं थीं, यह बात उनकी अंतिम यात्रा के समय बहुतायत में उपस्थित अन्य दलों के नेताओं को देखकर समझी जा सकती है। अब यह हमें सोचना है कि बुआजी के प्रति हम अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने उनके नाम पर एकाध काम आरंभ कराते हैं या कृतघ्नों की तरह सिर्फ गाल बजाते रह जायेंगे . . .!

4 thoughts on “कृतज्ञ हैं या कृतघ्न हैं हम!

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