बीएड का परिणाम तय करेगा,एजेंसी का भविष्य

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

ग्‍वालियर (साई)। जीवाजी विश्वविद्यालय में यूनीवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम यूएमएसलागू करने वाली नागपुर की फर्म माइक्रो-प्रो पर संकट के बादल मंडराने लगे है।

पांचवे सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों को लेकर हुई फजीहत के बाद जेयू प्रशासन ने फर्म को हटाने का मन बना लिया है। अंतिम अवसर के रूप में बीएड चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम की जिम्मेदारी दी है। यदि इस परीक्षा का परिणाम भी एजेंसी समय पर नहीं दे सकी तो कार्रवाई भी तय है।

यूजी पंचम सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों को लेकर हुई जेयू की फजीहत को लेकर शुक्रवार को कुलपति ने एक बैठक ली। बैठक में मुख्य मुद्दा कंपनी के कारण जेयू की बदनामी, छात्रों को हो रही परेशानी रहा। इस मामले में कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला ने कंपनी प्रतिनिधियों को करारी फटकार लगाई। कंपनी से काम वापस लेने की प्रक्रिया पर भी विचार किया गया। अंत में अधिकारियों ने तय किया कि कंपनी को बीएड चतुर्थ सेम के परीक्षा परिणाम तैयार करने के अवसर के साथ एक मौका ओर दे दिया जाए। यदि ये छोटा सा परिणाम भी समय पर नहीं दे पाए,तो कंपनी को हटाने पर विचार किया जाए।

5200 विद्यार्थी हैं बीएड में

बीएड में कुल मिलाकर 5200 विद्यार्थी है। चार प्रश्न पत्र होने से 20 हजार 800 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना है। जेयू ने इस परीक्षा के साथ ही मूल्यांकन का काम शुरू करा दिया है। 17 मई को निपटी इन परीक्षाओं का मूल्यांकन सप्ताह भर के अंदर निपटवाया जाएगा। उसके बाद फर्म को परिणाम तैयार करने 6 दिन का समय दिया जाएगा। यदि 6 दिन में भी फर्म परिणाम तैयार नहीं कर पाई तो यह मान लिया जाएगा कि यह फर्म बड़ी परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने लायक नहीं है।

फ्लैप स्कैन सिस्टम फ्लॉप

फर्म द्वारा टेंडर में डाली गई शर्त फ्लैप स्कैन सिस्टम को फॉलो नहीं कर पा रही है। परेशान जेयू प्रशासन ने भी इस सिस्टम से तौबा कर ली है। बीएड का परिणाम तैयार कराने ओएमआर सीट वाला पुराना सिस्टम अपनाया गया है। इस सिस्टम में परिणाम जल्द ही तैयार हो जाता है। अलवत्ता इस पद्घति में गोपनीयता उतनी अधिक नहीं रहती,जितनी कि फ्लैप स्कैन सिस्टम में रहती है।

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