सर्किट हाउस में चूहों का जबर्दस्त आतंक!

 

 

ऑब्ज़र्वर को काटा चूहे ने! अस्पताल में दी एक्सपायरी दवा!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। अति विशिष्ट लोगों को प्रवास के दौरान असुविधा से बचने के लिये लोक निर्माण विभाग के अधीन सर्किट हाउस में चूहों और अन्य जीव जंतुओं का आतंक पसरा हुआ है। बीति रात निर्वाचन के लिये आये ऑब्ज़र्वर श्री परमेश्वरम को चूहे ने काट लिया। उन्होंने देर रात अस्पताल जाकर उपचार करवाया।

लोक निर्माण विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात में लोकसभा चुनाव के लिये आये ऑब्ज़र्वर श्री परमेश्वरम को कमरे के अंदर चूहे ने काट लिया। उन्होंने देर रात अस्पताल जाकर अपना उपचार करवाया।

सूत्रों का कहना है कि विशालकाय रकबे में फैले सर्किट हाउस में चूहों का आतंक आज का नहीं है। इसके पहले भी उच्च न्यायालय के माननीय न्यायधीशों के प्रवास के दौरान रात को कोर्ट के एक भृत्य को भी चूहे के द्वारा काटा जा चुका है। सर्किट हाउस में अतिथियों की आवाजाही कम ही रहती है फिर सर्किट हाउस में मोटे – मोटे चूहे कहाँ से आ रहे हैं यह भी शोध का ही विषय माना जायेगा।

सूत्रों ने बताया कि इसके पहले भरत यादव जब जिला कलेक्टर हुआ करते थे उनके कार्यकाल में स्वच्छता अभियान का निरीक्षण करने आयीं एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को एक विषैले कीड़े ने रात में काट लिया था। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सहित चिकित्सकों की फौज देर रात तक उनकी सेवा टहल में लगी रही और उनके कमरे में कीटनाशक, हिट आदि का छिड़काव भी कराया गया था।

सूत्रों का कहना है कि सर्किट हाउस में आम आदमी विश्राम नहीं करते। सर्किट हाउस में अति विशिष्ट व्यक्ति ही रूकते हैं। इस लिहाज़ से सर्किट हाउस को चौबीसों घण्टे साफ सुथरा और मच्छर, कीट पतंगों आदि से मुक्त रखने की जवाबदेही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की है।

इधर स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि इसी रात इंद्रहास नगर निवासी नितिन डेहरिया भी रात लगभग बारह बजकर बीस मिनिट पर अस्वस्थ्य होने पर जिला अस्पताल पहुँचे। आपातकालीन प्रभाग (इमरजेंसी) में उपस्थित चिकित्सक के द्वारा उनका परीक्षण कर उन्हें दवा दी गयी।

सूत्रों की मानें तो जब वे वापस लौटे और दवा का रैपर देखा तो दवा एक्सपायरी डेट की थी। इसके बाद उनके द्वारा इसकी फोटो खींचकर जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी को इसे भेज दिया गया। एक्सपायरी डेट की दवा अस्पताल के भण्डार से इमरजेंसी कैसे पहुँची, यह शोध का ही विषय है।

सूत्रों ने बताया कि अमूमन जिनकी एक्सपायरी डेट आसपास ही होती है उन दवाओं को बहुत ही सावधानी से वितरित किया जाता है। इस तरह की दवाओं को अन्य दवाओं से पृथक ही रखा जाता है ताकि एक्सपायरी होने पर इन दवाओं को अलग किया जा सके।

सूत्रों ने बताया कि बुधवार को सुबह जिला चिकित्सालय का निरीक्षण करने पहुँचे जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा अधिकारियों को इस घटना के लिये जमकर फटकार लगायी। सूत्रों की मानें तो अस्पताल के भण्डार में तैनात एक लिपिक (जिनकी मूल पदस्थापना गोपालगंज में बतायी जाती है) के द्वारा सालों से इस भण्डार में अपनी मोनोपली चलायी जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि अस्पताल और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के भण्डार में बहुत सारी विसंगतियां हैं। यहाँ लोकल परचेज के नाम पर भी लाखों के वारे न्यारे किये जा रहे हैं। काँग्रेस के विधायकों के द्वारा अगर पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत खरीदी गयी दवाओं की ही जाँच करवा ली जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी भी हो सकता है।

जिला अस्पताल में गंदगी का साम्राज्य पसरा दिखता है, मरीजों के परिजन चौबीसों घण्टे वार्ड के अंदर घूमते रहते हैं, जबकि मरीजों से मिलने का समय दिन में महज दो घण्टे निर्धारित है। अस्पताल परिसर के अंदर शराब की खाली बोतलें भी पड़ी दिख जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में मरीजों से पैसे लेने के आरोप भी जब चाहे तब लगते रहे हैं।

वैसे यह घटना अपने आप में अनोखी इसलिये मानी जा सकती है क्योंकि जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा लगभग रोज ही जिला अस्पताल का निरीक्षण किया जा रहा है। उनके द्वारा किये जाने वाले निरीक्षण में किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ किसी तरह की कठोर कार्यवाही न होने के कारण अस्पताल की पटरी से उतरी व्यवस्थाएं जस की तस ही बनी हुई हैं।