झोला छाप चिकित्सकों के भरोसे हैं छपारा के लोग!

 

 

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। विकास खण्ड मुख्यालय छपारा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बाहर से आये चिकित्सकों के द्वारा अपना मकड़जाल फैलाया गया है। इन झोला छाप चिकित्सकों के पास न तो विधिवत डिग्री है और न ही दवाखाना चलाने का पंजीयन, फिर भी इनके द्वारा बेखौफ होकर उपचार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर संकट के बादल गहराते दिख रहे हैं।

बताया जाता है कि इन चिकित्सकों के दवाखानों पर तरह – तरह की दवाईयों का जखीरा भी हैं। ग्रामीण इलाकों से आये ग्रामीणों को महंगे दामों पर घटिया उपचार कर, यहीं दवा भी इनके द्वारा बेची जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के ढुल मुल रवैये के कारण इस तरह के झोला छाप चिकित्सकों के हौसले पूरी तरह बुलंदी पर दिखने लगे हैं।

बताया जाता है कि कई वर्षों से इस तरह के झोला छाप चिकित्सक क्षेत्र में आकर फल फूल चुके हैं। इन चिकित्सकों के हौसले इस कदर बुलंदी पर हैं कि इनके द्वारा आयुष चिकित्सा और एलोपैथिक चिकित्सा विज्ञान का खुला मजाक उड़ाया जा रहा है। इन चिकित्सकों के द्वारा तरह – तरह की दवाईयां अपने पास से मनमानी कीमतों पर दी जा रही हैं। कुछ महीनों पूर्व अवश्य ही झोला छाप चिकित्सकों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कार्यवाही की गयी थी, जिसमें दो चिकित्सक जेल की हवा भी खा चुके हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपारा में चिकित्सकों की कमी एवं पेरा मेडिकल स्टॉफ के सही समय पर अस्पताल में न आने का फायदा उठाकर, ये चिकित्सक ग्रामीण अंचलों में भी असुरक्षित तौर पर गर्भपात जैसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। यह मामला सामाजिक वर्जना टूटने के भय का होता है अतः इस मामले में ग्रामीण भी खामोश ही रह जाते हैं।

बताया जाता है कि इस क्षेत्र में चारों ओर ऐसे झोला छाप चिकित्सकों के दवाखाने संचालित हैं जिसमें भीमगढ़ के एक चिकित्सक ने अपने दवाखाने में तो बकायदा तीन पलंग का अस्पताल तक खोल रखा है। इस अस्पताल में बकायदा मरीजों को भर्त्ती कर उनका उपचार किया जाता है। इसी तरह चमारी, गोरखपुर, नांदिया, गनेशगंज, अंजनिया, गोरखपुर, बखारी आदि क्षेत्रों में भी इनकी दखल देखने योग्य ही हैं।

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