पाताल में जाता जल स्तर!

 

 

(शरद खरे)

सिवनी जिले में भूमिगत जल स्तर काफी तेजी से नीचे जा रहा है जो चिंता का विषय ही माना जायेगा। सिवनी में जमीनी पानी को रीचार्ज करने के लिये किसी भी तरह के कदम न उठाया जाना उससे ज्यादा चिंता का विषय है। अगर यही आलम रहा तो आने वाले सालों में एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बाँध को अपने दामन में सहेजने के बाद भी सिवनी जिले में पानी का संकट विकराल रूप धारण कर सकता है।

देखा जाये तो स्थानीय निकायों सहित जिला प्रशासन के द्वारा इसकी सुध ली जानी चाहिये। सिवनी में भूमिगत जल की सतह के नीचे जाने की खबरों के बाद भी प्रशासन की पेशानी पर चिंता की लकीरें न दिखना वाकई आश्चर्य का ही विषय माना जायेगा। इतना ही नहीं जनप्रतिनिधियों ने भी इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा है।

देश-प्रदेश में वर्षा के जल को संग्रहित कर उसके सदुपयोग के प्रयास जारी हैं। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर जल बचाने की अपीलें की जाती हैं, पर सिवनी में यह निष्प्रभावी ही प्रतीत होती हैं। सिवनी में कोई गैर राजनैतिक संगठन भी इसके लिये आगे आता नहीं दिख रहा है।

लगभग दो दशक पहले तक नलकूप खनन के दौरान दो सौ फीट की गहरायी पर पानी मिल जाया करता था, आज के समय में पानी, पाँच सौ फीट के नीचे ही मिल पा रहा है। यह गंभीर संकेत है भविष्य के लिये। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा नलकूप खनित किये जा रहे हैं और यह जमीनी हकीकत उसके सामने होने के बाद भी इस दिशा में प्रयास न होना वाकई किसी बड़ी विडंबना से कम नहीं माना जायेगा।

सिवनी नगर पालिका के द्वारा भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिये व्यवस्था और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नये भवनों के निर्माण में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया गया है। हमें यह कहने में कोई संकोच नही कि नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारियों के द्वारा अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ खरीदी की ओर ही केंद्रित किया जाकर, इस ओर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। लोगों के द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिये जमा करवायी जाने वाली राशि भी फर्जी तस्वीरों के जरिये वापस लेने की शिकायतें भी मिल रहीं हैं।

दूसरों की कौन कहे, जब सरकारी इमारतों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को नहीं लगाया गया है तो बाकी की सुध कौन लेगा। होना यह चाहिये कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सबसे पहले सरकारी भवनों (चाहे वे सरकारी हों या किराये के) में अनिवार्य कर दिया जाना चाहिये।

अगर ऐसा हुआ तो यह एक नज़ीर बनेगा और इससे होने वाले फायदों से जब आम जन रूबरू होंगे तब वे इसकी ओर प्रेरित हो सकते हैं। अभी समय है और समय रहते अगर सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का सिस्टम लगा दिया जाता है तो आने वाले बरसात के मौसम में इसका फायदा देखने को मिल सकता है। एक बार फिर यही कहा जायेगा कि जब कुंए में ही भाँग घुली हो तो किसी से क्या उम्मीद की जाये!

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