आतंकवादी पर प्रतिबंध

 

 

दक्षिण एशिया के घातक जेहादी संगठनों में से एक जैश-ए-मोहम्मद को दो दशक से ज्यादा समय तक चलाने के बाद अब मसूद अजहर पर फंदा कसने लगा है। इस आतंकवादी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वैश्विक आतंकवादी मान लिया है। कुछ हलकों में इसे भारत की जीत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन वास्तव में मसूद अजहर ने इस देश को भी समस्या के सिवा कुछ नहीं दिया है।

जैश-ए-मोहम्मद ने भले ही अपना फोकस कश्मीर पर रखा है, पर इसके गुर्गों ने पाकिस्तान में भी पर्याप्त तबाहियों को अंजाम दिया है। उदाहरण के लिए, इसके आतंकवादी एक ऐसा केंद्र बनाते हैं, जिसे पंजाबी तालिबान के रूप में जाना जाता है। यह जेहादियों का खुला संघ है। हालांकि पाकिस्तान में वर्ष 2002 में ही जैश-ए-मोहम्मद पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, पर उसकी गतिविधियां जारी रहीं और मसूद अजहर भी आजाद रहा। अब संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध के बाद उम्मीद है कि यह गुट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

भारत एक दशक से मसूद को ब्लैकलिस्ट करने के प्रयास में लगा था। हर बार चीन तकनीकी आधार पर ऐसे प्रयासों को रोकता आ रहा था। हमारी सरकार को यह एहसास करना चाहिए कि ऐसे गुटों को झेलना पाकिस्तान पर बोझ है। रणनीतिक लाभ देने की बजाय ये गुट वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग ही करते रहे हैं।

अगर हम अपने घर को संभाल पाते, तो भारत हालात का फायदा न उठा पाता, पाकिस्तान को जेहादी गुटों से जोड़कर नहीं दिखा पाता। उम्मीद है, मसूद को प्रतिबंधित करने के बाद पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। हम प्रमाणित कर पाएंगे कि हम सभी आतंकवादी संगठनों को उखाड़ फेंकने के लिए कड़ाई से काम कर रहे हैं।

अंततः उन सभी नॉन-स्टेट एक्टर्स को समाप्त करना होगा, जो नफरत, अलगाववाद और सांप्रदायिकता को हवा देते हैं। उनको मिल रही धनराशि रोकी जाए, उनकी सांगठनिक क्षमताओं को खत्म किया जाए। ये सब राष्ट्रीय कार्ययोजना में शामिल है, केवल क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति का सवाल है। (डॉन, पाकिस्तान से साभार)

(साई फीचर्स)