अधिवक्‍ता को दी हाई कोर्ट ने नसीहत

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

जबलपुर (साई)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के एक अधिवक्ता को सख्त चेतावनी दी है कि यदि दोबारा अदालत की शान में गुस्ताखी की कोशिश की गई तो न केवल स्टेट बार कौंसिल से सनद रद्द हो जाएगी बल्कि आपराधिक कार्रवाई से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी हिदायत के साथ न्यायमूर्ति आरएस झा व जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ ने अवमानना के आरोपित वकील द्वारा बिना शर्त माफी मांगने पर उसके खिलाफ निर्धारित किए गए अवमानना के आरोप वापस ले लिए।

धनवंतरि नगर, जबलपुर निवासी अधिवक्ता रवि एमके व्यास का उनकी पत्नी के साथ वैवाहिक विवाद चल रहा था। इसे लेकर दमोह जिला अदालत व फैमिली कोर्ट में प्रकरण चल रहे थे। हाईकोर्ट में भी इसी मसले पर मामला लंबित था। आरोप है कि व्यास ने दमोह जिला अदालत, फैमिली कोर्ट के जजों से कई बार अभद्रता की। इन सभी के साथ ही हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ भी अनर्गल टिप्पणियां कीं। इस पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर व्यास के खिलाफ अवमानना के दो प्रकरण दर्ज कर लिए।

जो हुआ वह उत्तेजना में हुआ- अधिवक्ता व्यास ने कोर्ट को बताया कि पत्नी से विवाद के चलते उसने उत्तेजना में अपना होश खो दिया था। मानसिक असंतुलन की अवस्था में उससे अनुचित हरकतें हो गईं। व्यास ने युगलपीठ से बिना शर्त माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी हरकत न दोहराने का वचन दिया। इस पर कोर्ट ने कहा कि अनावेदक के खिलाफ अवमानना का मामला स्पष्ट रूप से बनता है। इसके बावजूद ये आरोप वापस लिए जा रहे हैं। लेकिन भविष्य में ऐसी कोई हरकत दोहराने पर उसके खिलाफ सिविल व आपराधिक कार्रवाई होगी। अगली बार उसे बिना शर्त माफी भी नहीं दी जाएगी।

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