ईयरफोन का प्रयोग करें सावधानी से

 

(हेल्थ ब्यूरो)

सिवनी (साई)। जीवन में टेक्नॉलॉजी की बढ़ती भूमिका अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आयी है। इन्हीं में शामिल हैं ईयरफोन या हेडफोन के ज्यादा देर तक इस्तेमाल करने से होने वाले खतरे। अगर आप भी कुछ ऐसा ही करते हैं तो समय रहते सम्हल जायें। ये केवल आपके कानों को ही नुकसान नहीं पहुँचाता बल्कि ये आपके शरीर को कई और तरह से भी नुकसान पहुँचाता है।

कम सुनायी देना : लगभग हर ईयरफोन में हाई डेसीबल वेव्स होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से आप हमेशा के लिये अपनी सुनने की क्षमता खो सकते हैं इसलिये 90 डेसीबल से अधिक आवाज में गाने न सुनें और ईयरफोन से गाने सुनने के दौरान समय – समय पर ब्रेक भी लेते रहें। ईयरफोन्स के लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबेल तक कम हो जाती है। कान का पर्दा वाईब्रेट होने लगता है। दूर की आवाज सुनने में परेशानी होने लगती है। यहाँ तक कि इससे बहरापन भी हो सकता है।

कान सुन्न होना : लंबे समय तक ईयरफोन से गाना सुनने से कान सुन्न हो जाता है जिससे धीरे-धीरे सुनने की क्षमता जा सकती है। तेज आवाज में संगीत सुनने से मानसिक समस्याएं तो पैदा करती ही हैं इससे हृदय रोग और कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है़। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियां सामने आने लगती हैं। यह बाहरी भाग के कान के परदे को नुकसान पहुँचाने के साथ ही साथ अंदरूनी हेयरसेल्स को भी तकलीफ पहुँचाता है। उम्र बढ़ने के साथ बीमारियां सामने आने लगती है़ं।

कान का संक्रमण : ईयरफोन से लंबे समय तक गाना सुनने से कान में इंफेक्शन भी हो सकता है। जब भी किसी के साथ ईयरफोन शेयर करें तो उसे सेनिटाईजर से साफ करना न भूलें। आमतौर पर कान 65 डेसिबल की ध्वनि को ही सहन कर सकता है, लेकिन ईयरफोन पर अगर 90 डेसिबल की ध्वनि अगर 40 घण्टे से ज्यादा सुनी जाये तो कान की नसें पूरी तरह डेड हो जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनके ज्यादा उपयोग लेने से कानों में अनेक प्रकार की समस्या हो सकती है जिनमें कान में छन-छन की आवाज आना, चक्कर आना, सनसनाहट, नींद न आना, सिर और कान में दर्द आदि मुख्य हैं।

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