विधायकों ने क्यों की वरूण, कोठारी की सिफारिश!

 

 

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किसान नहीं खरीदना चाहते विधायकों की पसंद की मोटर और पाईप!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जिले के कमोबेश हर विभाग में ही चमड़े के सिक्के चलते दिख रहे हैं। अधिकारियों और चुने हुए प्रतिनिधियों की मनमानी रूकने का नाम नहीं ले रही है। जिले के दो काँग्रेसी विधायकों ने किसानों को सरकारी इमदाद पर मिलने वाले पाईप और मोटर को अपनी मनपसंद कपनी से खरीदने के लिये न केवल दबाव बनाया है वरन इसके लिये लिखित रूप से अनुशंसा भी की है।

जनजाती कार्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि संचालनालय स्तर पर 07 सितंबर 2018 को जारी एक पत्र में दिये गये दिशा निर्देशों का खुला उल्लंघन कर जिले के लखनादौन विधायक योगेंद्र ंिसह और बरघाट विधायक अर्जुन सिंह काकोड़िया के द्वारा कंपनी विशेष की मोटर और पाईप खरीदकर किसानों को प्रदाय करने की अनुशंसा करते हुए जिला कलेक्टर को पत्र लिखा गया है।

सूत्रों ने बताया कि वास्तव में किसानों को मोटर पंप और पाईप किसानों की पसंद की कंपनी के खरीदे जाने थे। इनमें गुणवत्ता का ख्याल सरकारी दिशा निर्देशों के तहत रखे जाने की जवाबदेही जनजाती कार्य विभाग की थी। यहाँ तो विधायक ही अपनी पसंद की कंपनी के पाईप और मोटर्स को गुणवत्ता का प्रमाण पत्र देते हुए उन्हें खरीदने का ताना बाना बुनते दिख रहे हैं।

सूत्रों ने आगे कहा कि लखनादौन विधायक योगेंद्र सिंह और बरघाट विधायक अर्जुन सिंह काकोड़िया के द्वारा अगर पृथक – पृथक कंपनी के पाईप और मोटर खरीदने की अनुशंसा की गयी होती तब भी बात समझ में आ सकती थी, किन्तु दोनों ही के द्वारा लगभग एक सी इबारत में लिखे गये पत्र अनेक शंकाओं को जन्म दे रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि दोनों के पत्रों का अगर गहरायी से अवलोकन किया जाये तो यही प्रतीत हो रहा है मानो दोनों ही पत्र किसी एक ही व्यक्ति (संभवतः कंपनी के किसी कर्मचारी) के द्वारा सामने बैठकर लिखवाये गये हैं। इस तरह के एक से पत्र प्राप्त होने पर इन पत्रों के उल्लेखित कंपनियों की गुणवत्ता और रैंकिंग के बारे में दरयाफ्त करने की जहमत भी किसी ने नहीं उठायी है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि मोटर और पाईप की खरीदी किसान को करना था, इसलिये उसके खाते में राशि डाल दी गयी थी। विभाग को अगर किसानों का मार्गदर्शन करना ही था तो विभाग को कम से कम पाँच दर्जन आईएसओ या आईएसआई मार्क की ब्रांडेड कंपनियों के मोटर पंप और पाईप्स एक स्थान पर रखवाकर किसानों को एक डेमो दिया जाकर अंतिम निर्णय किसानों पर छोड़ देना चाहिये था। इस काम के लिये एमपी एग्रो को पाँच फीसदी कमीशन मिलता।

सूत्रों ने कहा कि विधायकों के द्वार लिखे गये पत्रों में किसानों के नामों, निवास के ग्रामों का उल्लेख भी नहीं किया गया है ताकि यह पता चल सके कि इन दो कंपनियों से किसानों के द्वारा पाईप और पंप खरीदने की माँग की है। अब जबकि विधायकों के पत्र सोशल मीडिया पर उज़ागर हो चुके हैं तब इनमें संशोधन भी किया जाना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है।

एमपी एग्रो के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि राजधानी के किसी प्रभावशाली व्यक्ति के द्वारा दूरभाष पर दिये गये निर्देश के उपरांत एमपी एग्रो के द्वारा इस मामले में यू टर्न लेते हुए किसानों के खाते में डाली गयी राशि को वापस लिया जाकर वरूण और कोठारी कंपनी के ब्रांड एंबेसेडर के रूप में जिले के दोनों काँग्रेसी विधायकों को बनाने की पटकथा लिखी गयी है।

(क्रमशः जारी)

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