सराही जा रही युवाओं की अभिनव पहल

 

 

जरूरतमंदों को मुहैया करा रहे निःशुल्क भोजन

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। यूँ तो आशा और उम्मीद किसी भी उद्देश्य की, की जा सकती है पर यदि किसी भूखे व्यक्ति की भूख मिटाने की आशा की जाये और उस दिशा में कार्य किया जाये तो इसे नवाचार या इनोवेशन की श्रेणी में रखकर न केवल देखा जा सकता है बल्कि ऐसे कार्याें से जुड़े युवाओं को खुलकर सहयोग भी दिये जाने की अपेक्षा की जाना लाज़िमी होगा।

हुआ यह कि नगर के आशा कम्प्यूटर से जुड़ी हाईटेक टीम से जुड़े युवाओं ने सोचा कि क्यों न सार्वजनिक स्थानों पर भूखे प्यासे घूमते ऐसे व्यक्तियों के लिये किसी स्थान पर भोजन की व्यवस्था की जाये। ऐसा उन्होंने सोचा और उनका यह प्रयास सामने नज़र आने लगा जबकि आशा नामक इस संस्था ने स्थानीय बस स्टैण्ड के समीप छोटे से स्थान पर जरूरतमंदों में भोजन वितरित करना आरंभ कर दिया।

संस्था से जुड़े युवा अपने घरों से अतिरिक्त भोजन जो होता है उसे अपने साथ लेकर आते है और बस स्टैण्ड के सार्वजनिक स्थान के एक कोने पर भूखों को भोजन उपलब्ध कराते है। अभी यह उनका प्रयास उनकी आशा के अनुरूप प्रारंभिक स्तर पर है पर जैसे कि उनकी अपेक्षा है कि अन्य लोग भी परमार्थ के इस काम को आज से ही प्रारंभ कर आशा के इस अभियान में जुड़ जायें।

वैसे होता यह है कि लोगों के घर में जो भोजन बचता है अधिकांश लोग उसे नाली में व्यर्थ बहा देते है। संस्था के द्वारा उनसे यह अपील की गयी है कि यदि किसी के पास भोजन आवश्यकता से अधिक हैं तो उसे फेकें नहीं बल्कि उनकी संस्था तक पहुँचायें जो इसे जरूरतमंद लोगों तक पहुँचा देंगी।

अपने इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए आशा कम्प्यूटर से जुड़े प्रदीप विश्वकर्मा ने बताया कि वे एक दिन अपने सहयोगियों के साथ बस स्टैण्ड पर खड़े थे तभी एक महिला आयी और पैसे माँगते हुए कहने लगी कि वह तीन दिनों से भूखी है।

उस महिला की बात सुनकर आशा की टीम ने उसे ले जाकर उसे भोजन कराया और उसी दिन से उन्होंने ऐसा करने का ठान लिया। विश्व पर्यावरण दिवस और ईद 05 जून को इसकी विधिवत शुरूआत भी उन्होंने छोटे पैमाने पर कर दी है। फिलहाल दोपहर 12 बजे से 01 बजे के बीच बस स्टैण्ड पर यातायात थाने के समीप गरीबों को इस तरह से एकत्रित भोजन खिलाने की व्यवस्था की गयी है।

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