पॉलीथिन पर प्रतिबंध महज़ कागज़ों तक!

 

 

पालिका न कार्यवाही करती न फैलाती जनजागृति!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। पर्यावरण के लिये खतरा बन रही पॉलीथिन पर लगा प्रतिबंध जिले में बेअसर साबित हो रहा है। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों में पॉलीथिन अभी भी आसानी से मिल रही है। दुकानदार सुविधाओं का हवाला देकर बेखौफ इसका उपयोग कर रहे हैं।

सब्जी दुकानों से लेकर किराना और अन्य दुकानों में इसकी बानगी साफ देखी जा सकती है। रोजाना बाज़ार में लोगों को पॉलीथिन का उपयोग करते देखा जा सकता है। रोजमर्रा की सामग्री किराना, सब्जी, फल, चाय, नाश्ता ये सभी चीजें बिना पॉलीथिन के उपयोग के, घर तक ले जाना अभी लोगों के लिये काफी कठिनाई का काम है क्योंकि लोगों को अभी भी वही पुरानी आदत है।

बाज़ार में अभी भी दुकानदार पॉलीथिन बेच रहे हैं जिस कारण लोग पॉलीथिन का उपयोग लगातार किये जा रहे हैं। इसके चलते प्रतिबंध बेअसर होकर रह गया है। दुकानदारों की भी मजबूरी है कि जो ग्राहक आते हैं उनमें से बहुत कम ही लोग अपने घर से थैला लाते हैं। यदि वे दुकानदार पॉलीथिन में रखकर सामग्री नहीं देंगे तो उन्हें डर है कि उनका व्यापार, कहीं इससे प्रभावित न हो जाये।

लोगों में जागरूकता की कमी के चलते अभी भी उनकी आदत वही पुरानी बनी हुई है। पालिका के द्वारा न तो अमानक पॉलीथिन के संबंध में किसी तरह की कार्यवाही की जा रही है न ही जनजागृति फैलाने का काम किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि होटल से नाश्ता लाना हो तो चटनी – दही भी पॉलीथिन में रखकर लाना होता है। अभी इसका कोई विकल्प दिखायी नहीं दे रहा है।

गौरतलब है कि प्रदेश शासन ने पिछले साल 24 मई से पॉलीथिन कैरी बेग पर प्रतिबंध तो लगा दिया लेकिन उस पर अमल कर पाना जनता के लिये बहुत ही कठिनाई भरा साबित हो रहा है। कुछ लोग जागरूक हो भी गये और वे अपने साथ थैला ले जाने लगे हैं लेकिन पॉलीथिन का विकल्प अभी भी उपलब्ध नहीं हुआ है। विकल्प न होने के कारण लोग अभी भी पॉलीथिन का ही उपयोग कर रहे हैं।

इस संबंध में एक दुकानदार का कहना है कि उसकी जानकारी में यह बात है कि पॉलीथिन को प्रतिबंधित कर दिया गया है लेकिन कोई ग्राहक यदि सामान लेने आता है तो उसे मजबूरी में पॉलीथिन का उपयोग करना ही होता है। बाज़ार में पॉलीथिन कैरी बेग का कोई विकल्प उपलब्ध न होने के कारण दुकानदार और उसके ग्राहक पॉलीथिन का ही उपयोग करने के लिये मजबूर हैं।

वहीं, बारिश सिर पर है, नाले – नालियों की सफाई (अगर नगर पालिका के द्वारा की जा रही हो तो) में पॉलीथिन भी भारी मात्रा में निकल रही होगी, जो इस बात की चुगली कर रही होगी कि नगर पालिका परिषद के द्वारा पॉलीथिन पर प्रतिबंध के आदेश का पालन कितनी मुस्तैदी से करवाया जा रहा है। जरा सी हवा चलने पर लोगों के घरों, प्रतिष्ठानों के आसपास अमानक पॉलीथिन की पन्नियां नगर पालिका की सक्रियता की चुगली करती दिखती हैं। जगह – जगह पेड़ों पर हवा में फड़फड़ाती पॉलीथिन की पन्नियां देखते ही बनती हैं।

शहर वासियों ने संवेदनशील जिला कलेक्टर से जनापेक्षा व्यक्त की है कि शहर के नागरिकों को बुनियादी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने में पूरी तरह असफल भाजपा शासित नगर पालिका में एक नियंत्रणकर्त्ता अधिकारी बैठाया जाकर नागरिकों को राहत दिलाने के मार्ग प्रशस्त किये जायें।

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