किसलिये बना है कोटपा एक्ट!

 

 

(शरद खरे)

भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में सिवनी जिले में अफसरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी थी। इसके बाद काँग्रेस की सरकार प्रदेश में है। काँग्रेस की सरकार को प्रदेश में सत्तारूढ़ हुए आधा साल बीत चुका है, इसके बाद भी जिले में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली में किसी तरह का अंतर आज भी दिखायी नहीं दे रहा है।

जिले में कमोबेश हर विभाग में पदस्थ जिलाधिकारियों का अपने अधीनस्थों पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रह गया है। बाबूराज के बेलगाम घोड़े स्वच्छंद दौड़ रहे हैं। रियाया के द्वारा पहले की ही तरह हुक्मरानों की ओर टकटकी लगाकर रखी गयी है। रियाया को लग रहा है कि सरकार बदलने से उन्हें कुछ राहत मिलेगी।

24 जून से जिले भर में शैक्षणिक संस्थाओं का सत्र आरंभ हो जायेगा। विडंबना तो देखिये शालाओं यहाँ तक कि कोचिंग संस्थानों के आसपास भी तंबाखू, बीड़ी सिगरेट आदि की दुकानें कोटपा नियम को धता बताते हुए सीना ताने खड़ी हैं। नगर पालिका परिषद हो या शिक्षा विभाग, किसी को भी इस मामले में कार्यवाही करने की फुर्सत ही प्रतीत नहीं हो रही है।

जिलाधिकारी अगर सुबह सवेरे शहर की पान दुकानों पर जाकर नज़ारा देखें तो उन्हें समझ में आ जायेगा कि युवा हो रही नाबालिग पीढ़ी अभी से तंबाखू के चक्कर में पड़ चुकी है। इन दुकानों में शालाओं के गणवेश में ही युवा तंबाखू युक्त पदार्थ खरीदते दिख जायेंगे। यह वाकई दुःखद माना जा सकता है कि इसके बाद भी नगर पालिका और शिक्षा विभाग के द्वारा महज़ कागज़ी घोड़े दौड़ाकर रस्म अदायगी की जा रही है।

यह बात भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गयी है कि जिले में तंबाखू नियंत्रण समिति का गठन किया भी गया है अथवा नहीं! लोगों को इतना जागरूक भी नहीं किया गया है कि अगर नाबालिगों को तंबाखू वाले पदार्थ खरीदते देखा जाये तो वे इसकी शिकायत कहाँ और किससे करें!

शहर के अनेक शैक्षणिक संस्थानों से सौ मीटर के दायरे में ही पान दुकानें संचालित हो रहीं हैं जहाँ सरेआम तंबाखू वाले गुटखे, सिगरेट आदि को विद्यार्थियों के द्वारा खरीदा जा रहा है। इतना ही नहीं शहर के वीरान इलाकों, बबरिया पार्क सहित अनेक इलाकों में इन युवाओं को धुंए के छल्ले उड़ाते आसानी से देख जा सकता है।

देखा जाये तो कोटपा एक्ट को तंबाखू के नियंत्रण के लिये बनाया गया है। जिले में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा इस संवेदनशील मामले में मुँह क्यों मोड़ा गया है यह शोध का ही विषय है। सांसद, विधायकों को भी इस बात से ज्यादा लेना देना प्रतीत नहीं होता है कि ही अधिकारियों की मश्कें कसने की दिशा में पहल करें। संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि वे ही स्व संज्ञान से इस मामले में कार्यवाही करें ताकि देश का भविष्य बनने जा रही युवा पीढ़ी को तंबाखू के कहर से बचाया जा सके।

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