पुलिस अधीक्षक की सक्रियता

 

 

(शरद खरे)

लंबे समय बाद पुलिस विभाग में हलचल दिखायी दे रही है। इसका कारण नवागत पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक की शुरूआती सोची समझी बेहतरीन कार्यप्रणाली को ही माना जा सकता है। सिवनी में पदस्थ रहे कुछ ही पुलिस अधीक्षकों के द्वारा इस तरह की कार्यप्रणाली अपनायी गयी है, जिससे आम जनता को राहत मिली थी।

हाल ही में जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक के निर्देश पर पुलिस बल सक्रिय हुआ और बैंक्स में जाकर संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गयी। वैसे भी पुलिस की उपस्थिति ही अपने आप में मायने रखती है। सिवनी के इतिहास में संभवतः यह पहला ही मौका होगा जब पुलिस के द्वारा खुद ही बैंक्स में जाकर इस तरह की कार्यवाही को अंजाम दिया गया हो।

संचार क्रांति के दौर में आधुनिकीकरण के चलते पिछले कुछ सालों से बैंक से जुड़े फ्रॉड की तादाद में विस्फोटक बढ़ौत्तरी दर्ज की गयी है। इसमें खाता नंबर पूछना, ओटीपी (वन टाईम पासवर्ड) पूछना, बैंक्स के संबंध में अन्य जानकारियां मोबाईल से लेने के मामले शामिल हैं। सिवनी के बैंक उपभोक्ता इससे अछूते नहीं हैं।

बेरोज़गारी के इस दौर में युवाओं को नशे की लत लग चुकी है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। अपने नशे की आदतों को पूरा करने के लिये युवाओं के द्वारा गलत रास्तों को अपनाकर पैसा कमाने की चाहत रखी जा रही है। यही कारण है कि आजकल अपराध की तादाद में बढ़ौत्तरी दर्ज़ की जा रही है।

सिवनी में जुआ, सट्टा क्रिकेट सट्टा चरम पर है। अवैध शराब का कारोबार भी किसी से छुपा नहीं है। इसके अलावा मोबाईल लगभग निःशुल्क होने से अब सायबर क्राईम भी बढ़ता जा रहा है। बैंक्स में इस तरह के तत्वों के द्वारा अनावश्यक रूप से चक्कर काटकर लोगों को ठगा भी जा रहा है।

इस तरह की शिकायतें लगातार ही मिलती रहीं हैं, पर संतोष की बात यह मानी जा सकती है कि नवागत पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक के द्वारा इस ओर ध्यान दिया जा रहा है। इसके बेहतर प्रतिसाद सामने आने की उम्मीद की जा सकती है।

पुलिस अधीक्षक से यह भी अपेक्षा है कि काले शीशे वाले चार पहिया वाहनों, तेज आवाज वाले हॉर्न, साईलेंसर्स के खिलाफ भी अभियान का आगाज़ किया जाये। इसके अलावा देर रात तक नशे की जद में घूमने वालों से भी पूछताछ की जाये। सभ्य समाज में रात दस बजे के बाद शायद ही कोई घूमता हो।

जिले में अनसुलझे हत्या, चोरी, डकैती जैसे प्रकरणों को भी समय सीमा में सुलझाने की योजना अगर उनके द्वारा बनायी जाती है तो जरायपेशा लोगों में इसका भय व्याप्त हो जायेगा और अपराधों में कमी हो सकती है। जिले से होकर गुजरने वाले गौवंश के परिवहन पर भी लगाम लगाने की उनसे अपेक्षा की जा सकती है। बहरहाल, नवागत जिला पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक की कार्यप्रणाली से यही माना जा सकता है कि आने वाले दिनों में जिले में अपराधों में कमी आयेगी और जनता राहत महसूस करेगी।

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