बिना अनुमति कैसे हो गया कार्यक्रम!

 

 

नहीं दी थी कार्यक्रम की अनुमति : घोरमारे

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। शनिवार को बरघाट में नगर पंचायत के द्वारा डॉ.भीमराव अंबेडकर बस स्टैण्ड और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के लोकार्पण समारोह को लेकर सोशल मीडिया में रविवार को जमकर चर्चाएं चलती रहीं। यह कार्यक्रम अगर स्थगित कर दिया गया था तो बिना अनुमति कार्यक्रम में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग किस तरह किया जाने दिया गया।

सोशल मीडिया पर चल रहीं चर्चाओं के अनुसार शनिवार को बरघाट के नये बस स्टैण्ड के लोकार्पण कार्यक्रम को प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी के द्वारा स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद जिला कलेक्टर के सोशल मीडिया फेसबुक हेण्डल पर भी इस आशय की बात प्रसारित की गयी थी।

चर्चाओं के अनुसार अगर किसी को कोई कार्यक्रम करना होता है तो उसे संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से ध्वनि विस्तारक यंत्रों आदि के उपयोग की बकायदा अनुमति लेना आवश्यक होता है। यह कार्यक्रम जब स्थगित हो गया था और कलेक्टर के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर इस आशय की सूचना डाल दी गयी थी, इसका तात्पर्य यह है कि बरघाट के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सहित सभी अधिकारियों को इसकी जानाकारी रही होगी। इस लिहाज़ से इसके लिये दी गयी अनुमति (अगर दी गयी हों तो) अपने आप ही निरस्त या स्थगित हो जाती हैं।

चर्चाओं के अनुसार इसके बाद भी शनिवार को इस कार्यक्रम के लिये बरघाट के नये बस स्टैण्ड स्थल पर लोगों की भीड़ जुटती रही, शामियाना लगा रहा और लगभग ढाई तीन घण्टे तक कार्यक्रम चलता रहा, जिसमें नेताओं के द्वारा अपनी – अपनी बात कही जाती रही। अगर प्रशासन के द्वारा इस कार्यक्रम को रोका नहीं गया था तो इसका सीधा तात्पर्य यही था कि प्रशासन की नज़रों में यह कार्यक्रम पूरी तरह वैध था।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि कुछ साल पूर्व कवियित्री स्व.सुभद्रा कुमारी चौहान की याद में कराये जाने वाले कवि सम्मेलन को तत्कालीन नगर निरीक्षक शैलेष मिश्रा के द्वारा देर रात बंद करवा दिया गया था। बताया जाता है कि हाल ही में बस – स्टैण्ड पर चल रहे एक कार्यक्रम में भी ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग देर रात पुलिस के द्वारा बंद कराया गया था।

इस संबंध में बरघाट के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सी.एच. घोरमारे से जब संपर्क किया जाकर प्रशासन का पक्ष जानना चाहा गया तब उन्होंने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस कार्यक्रम के लिये प्रशासन के द्वारा अनुमति प्रदाय नहीं की गयी थी। उनसे जब यह जानना चाहा कि शादी ब्याह में ध्वनि विस्तारक यंत्र के लिये अनुमति की आवश्यकता होती है तब बिना अनुमति इस कार्यक्रम में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग कैसे होता रहा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अनुमति तो नहीं दी गयी थी अब एक दो दिन में दिखवाते हैं कि इस मामले में क्या किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फोन पर सारी बातें नहीं बतायी जा सकती हैं।

वहीं लोगों की मानें तो कार्यक्रम स्थल पर पुलिस बल भी तैनात था। अगर यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था तो शनिवार को ही बरघाट प्रशासन के द्वारा इस कार्यक्रम को रोका जाकर संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही की जाना चाहिये थी, वस्तुतः ऐसा हुआ नहीं। इसके कारण यही प्रतीत हो रहा है कि इस कार्यक्रम में बरघाट प्रशासन ने अपनी मौन सहमति प्रदान कर दी थी!

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि इस कार्यक्रम के संबंध में प्रभारी सीएमओ के द्वारा नगर परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम के आमंत्रण में प्रभारी मंत्री सुखदेव पांसे एवं स्थानीय विधायक अर्जुन काकोड़िया के नाम का उल्लेख नहीं किये जाने की बात कहकर इस कार्यक्रम को स्थगित करने की बात एक दिन पूर्व कही गयी थी।

बताया जाता है कि इस कार्यक्रम को लेकर उपजे विवाद के बीच राजधानी भोपाल से भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा प्रभारी सीएमओ को लगातार फोन किये जाते रहे। बरघाट के कुछ लोग भी प्रभारी सीएमओ से मिले बताये जा रहे हैं। वहीं भाजपा के नेता और नगर पालिका सिवनी के पार्षद अभिषेक दुबे ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी कि बरघाट प्रकरण के बाद प्रभारी सीएमओ को जिला चिकित्सालय की गहन चिकित्सा ईकाई में भर्त्ती कराया गया है।

लोगों का कहना है कि बरघाट में शनिवार को हुए घटनाक्रम के बाद अब काँग्रेस बैकफुट पर ही दिखायी दे रही है। इसका कारण यह है कि जाने अन्जाने बरघाट प्रशासन के द्वारा शनिवार को बिना किसी रूकावट कार्यक्रम को संपन्न होने दिया गया। अब अगर बरघाट प्रशासन के द्वारा किसी तरह की कार्यवाही को अंजाम दिया जाता है तो इस पर अनेक सवालिया निशान भी खड़े हो जायेंगे।

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