यात्री बसों के किराये पर किसी का नहीं नियंत्रण!

 

 

सूत्र सेवा वाले मार्ग पर नहीं बढ़े किराये!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी से आने – जाने वाले यात्रियों की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। नेशनल या टूरिस्ट परमिट के नाम पर संचालित होने वाले यात्री वाहनों में मनमाना किराया लिया जा रहा है। यहाँ तक कि स्टेट कैरिज वाहनों में भी मनमाने किराये की शिकायतें आम हो गयी हैं।

यात्रियों ने बताया कि सिवनी से होकर गुजरने वाले वाहनों में यह पता करना दुष्कर कार्य होता है कि यात्री बस स्टेट कैरिज के तहत वैध परिमिट धारक है या टूरिस्ट या नेशनल परमिट पर संचालित हो रही है। नागपुर में जिन वाहनों को सरकारी बस स्टैण्ड के आसपास फटकने नहीं दिया जाता है वे यात्री बस सिवनी में सरकारी बस स्टेण्ड पर सीना ताने खड़े होकर सवारियां भरती नज़र आती हैं।

यात्रियों की मानें तो संचार क्रांति के इस युग में बस संचालकों के द्वारा अपने – अपने वाहनों में ऑन लाईन बुकिंग के लिये पोर्टल्स बना लिये गये हैं। वहीं रेड बस जैसे पोर्टल्स पर भी इन बसों की बुकिंग सुविधा उपलब्ध है। अब घर बैठे किसी भी बस में खाली सीट पर बुकिंग आसानी से करवायी जा सकती है।

इधर, परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मेले ठेले, तीज त्यौहारों के दौरान ऑन लाईन बुकिंग के दौरान निर्धारित किराये से चार से पाँच गुना किराया प्रदर्शित किया जाता है। इसकी शिकायत पूर्व में भी तत्कालीन जिलाधिकारियों से किये जाने के बाद भी नतीज़ा सिफर ही निकला है।

सूत्रों का कहना है कि छिंदवाड़ा से जबलपुर चल रही सूत्र सेवा एसी बस में शादी ब्याह के दौरान भी किराया वही रहा जो ऑफ सीजन में हुआ करता था। सूत्र सेवा के आरामदायी सफर में किराया न बढ़ाये जाने से अन्य ऑपरेटर्स के द्वारा भी किराया बढ़ाने की हिम्मत नहीं की जा सकी थी।

सूत्रों ने कहा कि सूत्र सेवा की तरह अनेक ऑपरेटर्स अब नागपुर से जबलपुर के बीच एसी बस चलाने का प्रस्ताव लिये खड़े हैं। इन ऑपरेटर्स का मानना है कि वे परिवहन विभाग के द्वारा निर्धारित किराये से एक रूपये ज्यादा नहीं लेंगे पर उन्हें परिवहन विभाग के द्वारा टाईमिंग प्रदाय कर दी जाये।

यात्रियों ने सांसद, विधायकों से जनापेक्षा व्यक्त की है कि यात्रियों के साथ हो रही इस तरह की लूट को समाप्त करने और नागपुर से जबलपुर के बीच ऑपरेटर्स के द्वारा दिये जा रहे प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाये ताकि निजि ऑपरेटर्स की मोनोपली को समाप्त किया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *