बड़ के नीचे छाँव का टोटा!

 

 

बैनगंगा के होते हुए पेयजल को तरस रहे छपारावासी!

(फैयाज खान)

छपारा (साई)। बड़ के झाड़ के नीचे अगर छाँव का टोटा (कमी) हो जाये तो इसे क्या माना जायेगा? इसी कहावत को छपारा ग्राम पंचायत चरितार्थ करती दिख रही हैै। एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बाँध का पेट भरने वाली पुण्य सलिला बैनगंगा के किनारे बसे छपारा शहर में लोग बूंद – बूंद पानी को तरसते दिख रहे हैं।

मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत का दर्जा पाने वाली ग्राम पंचायत छपारा में नगर वासी पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। बताया जाता है कि ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण शहर के नल पानी नहीं उगल रहे हैं। कभी लोग गंदे पानी की समस्या से जूझते दिखते हैं तो कभी नल न आने की शिकायत आम होती है।

छपारा के कमोबेश हर वार्ड में पेयजल की त्राहि त्राहि मची हुई है। लोगों ने बताया कि जब इस समस्या से पंच सरपंच को आवगत कराया जाता है तो उनके द्वारा पाईप लाईन में कम प्रेशर होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है। वहीं, शहर भर में टुल्लू पंप के जरिये लोग पानी खींचते भी नज़र आते हैं जिससे पानी का दबाव कम होना स्वाभाविक ही है।

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