सारना में 115 एकड़ जमीन पर बनेगा विश्वविद्यालय

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

छिंदवाड़ा (साई)। जिले में विश्विद्यालय को लेकर प्रक्रिया तेज गति से चल रही है। राजपत्र प्रकाशन के बाद अब जमीन की भी तलाश का काम पूरा हो गया है।

वैसे तो विश्विद्यालय के लिए 6 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है, लेकिन जिले में खुलने वाले विश्वविद्यालय के लिए 115 एकड़ जमीन सारना में आवंटित की जा रही है। एसडीएम अतुल सिंह के मुताबिक सारना में विश्वविद्यालय का निर्माण होगा। छिंदवाड़ा में विश्वविद्यालय खुलने से चार जिलों के छात्र-छात्राओं को इसका फायदा मिलेगा।

इसके तहत स्नातक प्रथम वर्ष और स्नातकोत्तर के प्रथम वर्ष के लिए शिक्षण सत्र से छात्र छात्राओं को दाखिला मिलना शुरू हो जाएगा। जिसमें छिंदवाड़ा के अलावा बैतूल, सिवनी और बालाघाट के करीब एक लाख से ज्यादा छात्र छात्राओं को फायदा मिलेगा। शुरुआत में पीजी कॉलेज में ही इसे संचालित किया जाएगा। जिसके बाद सारना में विश्वविद्यालय बनने के बाद आगे की प्रक्रिया होगी और वहां ही कैंपस विभिन्ना विभागों का निर्माण और तमाम निर्माण कार्य किए जाएंगे।

ये आवासीय परिसर होगा। जिसमें खेल मैदान लैब समेत तमाम प्रकार की सुविधाएं विकसित की जाएगी। जाहिर है इस विश्वविद्यालय के निर्माण से छिंदवाड़ा चार जिलों का केंद्र बन जाएगा। छिंदवाड़ा जिले के छात्र संगठन लंबे समय से कॉलेज की मांग करते रहे हैं।

माइग्रेशन, पुर्नमूल्यांकन फीस समेत तमाम काम के लिए जिले के छात्र छात्राओं को जबलपुर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। युवा सम्मेलन में एक साल के लिए तो छिंदवाड़ा के छात्र ही नहीं जा सके थे। संबद्धता को लेकर भी छात्र छात्राएं काफी परेशान रहे। सतपुड़ा महाविद्यालय के छात्र छात्राएं जबलपुर से संबद्ध हैं तो वहीं पीजी कॉलेज आटॉेनामस है। डीडीसी और कन्या महाविद्यालय में भी यही समस्या बनी रही है।

सतपुड़ा विश्वविद्यालय हो सकता है नाम : विश्वविद्याल की पृष्ठभूमि पहले ही तैयार हो गई थी। इसके लिए लगातार प्रक्रिया की जा रही थी। चुनाव के पहले ही विश्वविद्यालय को लेकर काम शुरू हो गया था। आचार संहिता के दौरान उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त ने दौरा किया था। जिसके बाद आचार संहिता हटते ही इसे हरी झंडी दे दी गई।

इसके बाद सतपुड़ा विश्वविद्यालय के नाम से विश्वविद्यालय नाम रखने की कवायद की जा रही थी, लेकिन अब इसका नाम छिंदवाड़ा विश्विविद्यालय हो जाएगा। बैतूल के छात्र बतकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध था।

2021 तक होगा निर्माण : करीब तीन सौ करोड़ की लागत वाले महाविद्यालय का निर्माण करीब तीन सौ करोड़ की लागत से होगा। जिसके लिए टेंडर की भी जारी हो गए है। ऐसे में 2021 तक इसका निर्माण कार्य पूर्ण होने की उम्मीद जताई जा रही है। निर्माण कार्य पूरा होने से छिंदवाड़ा चार जिलों में शिक्षा के क्षेत्र का लीडर बनेगा। यही वजह है कि लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था।

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