तीन पूर्व सांसद व पूर्व विधायक के खिलाफ EOW ने शुरू की जांच

 

 

 

 

कलेक्टर भी जद में

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। पूर्व सांसद मनोहर ऊंटवाल, चिंतामणी मालवीय व राज्यसभा के पूर्व सांसद नारायण सिंह केसरी और नामनिर्दिष्ट विधायक लोरेन बी लोबो के खिलाफ EOW ने जांच शुरू कर दी है। चारों जन प्रतिनिधियों पर अपने कार्यकाल में सांसद व विधायक निधि में गड़बड़ी के आरोप हैं। सांसदों ने अपने चहेते एनजीओ को स्कूलों में कंप्यूटर सप्लाय करने के लिए कलेक्टरों को पत्र लिखकर अनुशंसा की है।

इधर, कलेक्टरों ने बिना शासकीय प्रक्रिया अपनाए सीधे जबलपुर के सोसायटी फॉर अवेयरनेस एंड मोटिवेशनल इन बेसिक आस्पेक्ट्स ऑफ लाइफ (संबल) नामक एनजीओ को काम दे दिया। इसके संचालक अभय तिवारी भी जांच के दायरे में है। ईओडब्ल्यू की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि तीनों सांसदों ने जनहित के काम के लिए मिली सांसद निधि की एनजीओ व कलेक्टरों के जरिए बंदरबांट की गई है।

जांच में यह भी सामने आया है कि एनजीओ द्वारा स्कूलों में सप्लाय किए गए कंप्यूटर घटिया गुणवत्ता वाले हैं, जबकि सांसद निधि से उच्च गुणवत्ता वाले कंप्यूटरों के पैसे लिए गए हैं। वहीं, नामनिर्दिष्ठ विधायक (तत्कालीन) लोरेन बी लोबो ने भी विधायक निधि के पैसों से जनहित के काम करवाने के बजाय अपने नजदीकी लोगों व रिशतेदारों की संस्थाओं को लाखों रुपए बांटे हैं।

तीनों सांसदों की निधि से 1 करोड़ 56 लाख रुपए के कंप्यूटर सप्लाय की अनुशंसा का खुलासा अब तक की जांच में हुआ है। अब इनके पांचों साल के कार्यकाल की जांच की जा रही है। साथ ही संबल एनजीओ की भी जांच की जा रही है, कि इसे और किन सांसदों ने सांसद निधि से पैसे दिए हैं।

देखिए, माननीय ने विधायक-सांसद निधि का क्या किया

  1. मनोहर ऊंटवाल जब सांसद थे तो उन्होंने 2014-15 में शाजापुर जिले के 10 स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन के लिए सांसद निधि से 6 लाख रुपए प्रति स्कूल देने की स्वीकृति दी। स्वीकृति के साथ ही उन्होंने यह भी अनुशंसा की कि कंप्यूटर सप्लाय का आदेश संबल एनजीओ को ही दिया जाए। तत्कालीन कलेक्टर शाजापुर ने बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए सीधे संबल को काम दे दिया। संबल ने घटिया किस्म के असेंबल्ड कंप्यूटर सप्लाय कर खानापूर्ति कर दी।
  2. ऊंटवाल ने ही 2015-16 में फिर आगर-मालवा जिले के 4 स्कूलों में कंप्यूटर सप्लाय के लिए सांसद निधि से 6 लाख रुपए प्रति स्कूल की अनुशंसा कर दी। इसमें भी कलेक्टर ने शासकीय प्रक्रिया अपनाए बिना संबल एनजीओ को काम दे दिया। यहां भी घटिया कंप्यूटर सप्लाय हुए।
  3. उज्जैन से जब चिंतामणी मालवीय सांसद थे, उन्होंने 2014-15 में उज्जैन के 8 स्कूलों में सांसद निधि से कंप्यूटर सप्लाय करने की अनुशंसा की। काम संबल को ही देने का भी कलेक्टर को लिखित में कहा। कलेक्टर ने 6 लाख रुपए प्रति स्कूल के मान से जारी कर दिया। यहां भी घटिया कंप्यूटर सप्लाय हुए।
  4. पूर्व राज्यसभा सांसद नारायण सिंह केसरी ने 2014-15 में रतलाम के 4 स्कूलों में सांसद निधि से कंप्यूटर सप्लाय करने की अनुशंसा की। काम संबल एनजीओ को ही देने को लिखा। कलेक्टर ने बिना किसी प्रक्रिया के संबल को आदेश दे दिया। यहां भी घटिया कंप्यूटर सप्लाय हुआ।
  5. मनोनीत पूर्व विधायक लोरेन बी लोबो, जबलपुर ने 2007 से 2018 तक विधायक निधि से उनके रिश्तेदारों की संस्थाओं को लाखों रुपए दिए। इनमें सनराइज फुटबॉल क्लब, स्टार क्रिकेट क्लब और सरगम संगीत सेंटर आदि के नाम प्राथमिक जांच में सामने आए हैं।

मनोहर ऊंटवाल, चिंतामणी मालवीय, नारायण सिंह केसरी व विधायक रही लोरेन बी लोबो की सांसद-विधायक निधि की जांच की जा रही है। अब तक की जांच में पता चला है कि एक रैकेट ने मिलकर निधि का दुरुपयोग किया है। इसमें कलेक्टर, सांसद व एनजीओ संचालक मिले हुए हैं। जिस गुणवत्ता का कंप्यूटर दिया जाना था, वह नहीं दिया गया।

केएन तिवारी,

डीजी, ईओडब्ल्यू

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