ऑनलाइन दुनिया और अकेलापन

 

 

(प्रणव प्रियदर्शी)

मैं सेंटर पहुंच गई हूं। अब दो – चार मिनट में गेट खुलने वाला है, फिर हम अंदर जाएंगे। मोबाइल पर यह मेसेज अभी – अभी आया। बेटी गई है एक यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस टेस्ट देने। मेसेज पाकर मैंने इतमीनान की सांस ली, हालांकि यह एक ही शहर की बात है और उसके घर से निकलने से लेकर संदेश मिलने तक बमुश्किल 50 मिनट ही हुए।

ऐसा ही संदेश मुझसे मेरे माता – पिता को मिला था करीब तीन दशक पहले, मैं मुंबई पहुंच चुका हूं। कल से जॉइन करना है। अभी एक दोस्त के साथ हूं, कुछ दिनों में रहने का कोई इंतजाम करना होगा। तब मेरा संदेश डाक विभाग के जरिए एक पोस्टकार्ड पर पहुंचा था, मेरे भेजने के नौ दिन बाद लेकिन उस संदेश ने माता – पिता समेत पूरे परिवार को राहत वैसी ही पहुंचाई, जैसी इस मोबाइल संदेश ने मुझे पहुंचाई। सच पूछें तो वह राहत कई गुना ज्यादा रही होगी क्योंकि उसके लिए उन्हें नौ दिन इंतजार करना पड़ा।

अब दिल्ली, मुंबई तो क्या, बच्चे पूरी दुनिया नाप रहे हैं अपने कदमों से और ईमेल, वॉट्सऐप, विडियो कॉल वगैरह के जरिए हम पल – पल उनसे जुड़े हुए भी रहते हैं। बच्चे ही क्यों, तमाम दोस्त – मित्र, रिश्तेदार – सभी तो जुड़े रहते हैं फेसबुक, वॉट्सऐप, ट्विटर वगैरह के जरिए। फिर कब, क्यों, कैसे दूरी आ जाती है हमारे बीच। सुबह, दोपहर, शाम तमाम झूठे – सच्चे संदेश वॉट्सऐप पर फॉरवर्ड करते रहने के बावजूद हम एक – दूसरे के सुख – दुख में मन से शामिल नहीं हो पाते। अपनी जिंदगी का चमचमाता हिस्सा तो शेयर करते हैं दूसरों से लेकिन गम जब्त कर जाते हैं। बच्चे ने ड्राइंग अच्छी बनाई, यह तस्वीर समेत दिखाते हैं लेकिन गणित वह ठीक से नहीं समझ पाता और इसलिए टीचर ने बुलाकर शिकायत की, यह नहीं बताते। भरोसा नहीं है कि यह बात जानकर हमारा फ्रेंड सर्कल कैसे रिऐक्ट करेगा। डरते हैं कि वह हमें और हमारे बच्चे को मामूली या सामान्य न मान ले। सामान्य व्यक्ति भी कहीं जी पाता है आज की दुनिया में! हमें तो असाधारण होना है, असाधारण दिखना है।

दिखने की यही चाहत या मजबूरी हमें सबसे न केवल अलग किए हुए है बल्कि अघोषित होड़ में डाले हुए है। हम सबसे जुड़े तो रहते हैं, सफलता की उनकी कहानियों पर नजर रखते हुए उनकी असलियत समझने की चेष्टा भी करते रहते हैं लेकिन इसके साथ ही अपनी कहानियां सुनाते हुए अपनी असलियत छुपाए रखने की चालाकी भी बरतते चलते हैं। नतीजा यह कि इस पूरी तरह कनेक्टेड दुनिया में अपने मन के द्वीपों पर अपनी असुरक्षाओं, आशंकाओं से घिरे नितांत अकेला जीवन बिताने को अभिशप्त हैं।

(साई फीचर्स)

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