सालों तक दिलों पर राज करेंगी विमला बुआ

 

 

(अखिलेश यादव)

यूं तो राष्ट्रीय परिदृश्य में अनेक सियासतदार होंगे जिन्हें देशवासी याद करते होंगे पर जीते जी किवदंती बन चुकीं सिवनी की आयरन लेडी के नाम से विख्यात सुश्री विमला वर्मा का नाम आज भी लोगों के द्वारा भले ही वे किसी भी दल के सदस्य हों के द्वारा बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है।

सन 1967 से सिवनी में विकास की गंगा लाने वालीं भगीरथी हैं विमला वर्मा जिन्होंने अपने राजनैतिक जीवन का पहला चुनाव सन 1967 में सिवनी जिले की केवलारी विधान सभा क्षेत्र से लड़ा, निर्वाचित हुईं और मध्य प्रदेश शासन के मंत्री पद से जो यात्रा प्रारम्भ हुई वो विभिन्न विभागों के मंत्रालयों से लेकर भारत शासन के केन्द्रीय मंत्री, तत्पश्चात सांसद के कर्त्तव्यों के निर्वहन पश्चात सक्रिय राजनीति से सन्यास लेकर अपनी राजनैतिक यात्रा को उन्होंने विराम दिया।

विमला वर्मा ने अपने राजनैतिक जीवन में सिवनी जिले मे गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, सिंचाई के साधन, नहरें, पुल, स्कूल, महाविद्यालय, स्वास्थ्य केन्द्र, मेडीकल कॉलेज के समकक्ष जिला चिकित्सालय, तत्कालीन समय में एशिया का चौथे नंबर का सीपेट प्लान्ट, एशिया का सबसे बड़ा एकमात्र मिट्टी का भीमगढ़ बांध, दूरदर्शन केन्द्र, बाल सेविका प्रशिक्षण केन्द्र केवलारी, आई.टी.आई., कन्या महाविद्यालय, लोक निर्माण विभाग, विद्युत मंडल व राज्य परिवहन निगम का संभागीय कार्यालय व वर्कशॉप, कृषि विज्ञान केन्द्र, केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, चिलिंग प्लांट बंडोल, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, जिले में कम्प्यूटरीकृत शिक्षा प्रणाली आदि विमला वर्मा के कार्यकाल की प्रमुख देन हैं। इसके अतिरिक्त अनेक ऐसे कार्य व योजनाएं हैं जिससे आज भी यह जिला लाभान्वित हो रहा है।

विमला वर्मा को केन्द्रीय राजनीति में ले जाने का श्रेय सिवनी संसदीय क्षेत्र से तत्कालीन सांसद व केन्द्रीय मंत्री पं.गागीर्शंकर मिश्रा को जाता है जिनका सतत सहयोग प्रदेश की राजनीति में भी विमला वर्मा को प्राप्त होता रहा। विमला वर्मा के बाल सखा, जीवन पर्यन्त सहयोगी व प्रेरक रहे स्व.ओम प्रकाश वर्मा, स्व.रमेश चन्द्र यादव (मेरे पूज्य पिताजी) स्व.पी.पी. बख्शी,व स्व.पं.महेश प्रसाद शुक्ला का सहयोग भी उन्हें सियासी ऊंचाईयों को पाने में मददगार साबित हुए।

विमला वर्मा ने राजनीति मे प्रवेश केवल जनसेवा के लिये किया था जिसे उन्होंने करके दिखाया। पूरे जीवन व राजनैतिक जीवन में ईमानदारी व बेदाग छवि की अदभुत मिसाल विमला वर्मा हैं। उनका पूरा जीवन लोगों के लिये प्रेरणादायी माना जा सकता है। उन्होंने परिवार पर हुए वज्राघात के चलते आजीवन अपने घर, परिवार, जिले, देश और प्रदेश के लिये अपना जीवन समर्पित करने का न केवल संकल्प लिया वरन उसे निभाया भी।

वर्तमान व तत्कालीन राजनीति के प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के प्रायः सभी राजनीतिज्ञों के लिये विमला वर्मा का नाम अछूता नहीं है। विमला वर्मा के त्याग शील जीवन व बहुआयामी व्यक्तित्व की विशालता को शब्दों में बांध पाना असंभव कार्य है फिर भी जो सौभाग्य मुझे अपनी किशोर अवस्था में बुआजी (सुश्री विमला वर्मा) के विश्वास व सानिध्य का मिला उन्हीं स्मृतियों के आधार पर यह अभिव्यक्ति है।

विकास की इस अविरल धारा का उदगम 01 जुलाई 1929 को पिता रायबहादुर के.पी. (कृष्ण प्रसाद) वर्मा एवं माता श्रीमति लक्ष्मी देवी की पवित्र कोख से हुआ जिनके नाम को अजर अमर बनाये रखने के पवित्र उद्देश्य से विमला वर्मा ने न्यास गठित कर प्रतिवर्ष प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करने का लक्ष्य रखा है।

सिवनी जिले के लिये अपना जीवन समर्पित करने वालीं विमला वर्मा के द्वारा जो भी किया है वह अनुकरणीय, प्रेरणादायी व सराहनीय है। 01 जुलाई को सिवनी को अनगिनत सौगातें देने वाली आयरन लेडी, आज उमर दराज हो चुकी पीढ़ी की दीदी और प्रौढ़ावस्था की ओर अग्रसर लोगों की बुआ एवं सिवनी की आयरन लेडी जिसने सिवनी जिले के नाम को देश प्रदेश के सियासी गलियारों में ऊंचा उठाया है, अब हमारे बीच नहीं हैं। उनके द्वारा दी गई सौगातों, उनके सरल किन्तु अनुशासनप्रिय व्यवहार, उनकी दरियादिली और दूरंदेशी के लिए सालों साल तक सिवनी के नागरिकों के दिलों पर वे राज करती रहेंगी।

(यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश यादव के द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गयी थी, जिसका संपादित अंश पाठकों के लिये प्रस्तुत किया गया है)

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