बर्गर-पिज्जा का प्यार न बना दे इस गंभीर बीमारी का शिकार

 

 

 

 

बर्गर, पिज्जा जैसे फास्ट फूड डायबिटीज की आशंका को कई गुणा बढ़ा देते हैं। इनसे आप कई अन्य बीमारियों के भी शिकार हो सकते हैं। जानकारी दे रहे हैं अपोलो इंस्टीट्यूट ऑफ बैरियाट्रिक एंड मेटाबॉलिक सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अतुल एनसी पीटर्स

आज के बच्चों (बहुत से वयस्कों की भी) के खानपान की आदतों में फास्ट फूड बहुत तेजी से शामिल होता जा रहा है। इन बहुत ज्यादा कैलरी वाले खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की मात्रा बहुत कम होती है। संतृप्त वसा (सेचुरेटेड फैट) और कोलेस्ट्रॉल युक्त इन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन मेटाबॉलिज्म के बिगड़ने का कारण बनता है और इस वजह से भारत में मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों के मामलों में बहुत तेज वृद्धि देखने को मिल रही है। 

अगर माता-पिता का वजन अधिक है

अगर मां और पिता, दोनों का वजन ज्यादा है तो बच्चे के भी मोटापे से पीड़ित होने की आशंका 60 से 80 प्रतिशत बढ़ जाती है। मोटे बच्चे के बड़े होने पर भी मोटापे से पीड़ित होने की आशंका 70 प्रतिशत होती है। कई मोटे बच्चों के अनुभवों के आधार पर यह बात सामने आई है। उन बच्चों को लगता है, मोटे होने की वजह से उन्हें जिस समस्या का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है, वह है सामाजिक भेदभाव। इसका नुकसान यह हो सकता है कि वे दूसरे बच्चों के साथ व्यायाम करने में हिचकेंगे और इस तरह उनमें असामाजिकता और अवसादपूर्ण प्रवृत्तियां घर करती जाएंगी। इसका मनोवैज्ञानिक असर उन पर जीवनपर्यंत रह सकता है।

हो सकती हैं कई और समस्याएं

मोटापे से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। खासकर युवावस्था में ही जोड़ों और धमनियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। बचपन से ही मोटापे से ग्रस्त लोगों में कुछ बीमारियां होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है।

ध्यान देना है जरूरी

अगर हम अभी सक्रिय नहीं हुए, तो वह दिन दूर नहीं, जब भारत के हर घर में परिवार के ज्यादातर सदस्य अपना शुगर लेवल जांच रहे होंगे और डायबिटीज व हृदय रोगों की दवा निगल रहे होंगे! ऐसे में आने वाले समय में अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के जन्मदिन पर उपहार के रूप में ब्लडप्रेशर मॉनिटर, ग्लूकोमीटर आदि देने की प्रथा चल पड़ेगी।

क्या हैं कारण

बच्चे ज्यादा कैलरी वाले खाद्य पदार्थ खा रहे हैं। मां-बाप बच्चों को पोषक फल-सब्जियां और नाश्ता, लंच देने की बजाय उच्च फ्रुक्टोज युक्त खाद्य पदार्थ तथा पेय दे रहे हैं।

बच्चों के मनोरंजन के तरीके भी पहले से काफी बदल गए हैं। पहले बच्चे अपने भाई-बहनों और पड़ोस के दूसरे बच्चों के साथ मैदान में खेलते थे। अब वे वीडियो गेम खेलते हुए, टीवी देखते और कंप्यूटर के सामने समय बिताते हैं।

अब बच्चे स्कूल, बस स्टॉप या पार्क तक पैदल कम जाते हैं। वे अब गर्मियों में साइकिल चला कर स्विमिंग के लिए नहीं जाते और न ही स्थानीय पार्कों में जॉगिंग के लिए जाते है।

(साई फीचर्स)

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