संजय मण्डल का सराहनीय सुझाव

 

 

(शरद खरे)

सिवनी में अमान परिवर्तन सहित प्रदेश और केंद्रीय योजनाओं के काम मंथर गति से चलते आए हैं। सिवनी के विकास लिए स्व. विमला वर्मा के उपरांत किसी भी सियासतदार ने ईमानदारी से प्रयास नहीं किए हैं। किए भी हैं तो वे परवान नहीं चढ़ पाए, इसमें इच्छाशक्ति का अभाव ही प्रमुख वजह माना जा सकता है।

सिवनी में फोरलेन का काम अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। फोरलेन पर ट्रामा केयर यूनिट की संस्थापना नहीं हो पाई है। जिला अस्पताल में अन्य केंद्रीय इमदाद से बना ट्रामा केयर यूनिट भी शोभा की सुपारी बना हुआ है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की महिला आरक्षक को जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिल पाया था। अगर ट्रामा केयर यूनिट चालू होता तो उन्हें बचाया जा सकता था।

बहरहाल, छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर तक रेल्वे का अमान परिवर्तन का काम जारी है। नैनपुर से जबलपुर तक अमान परिर्वतन हो चुका है। सालों से रामटेक से गोटेगांव के बीच नई रेल लाईन की मांग उठती आई है। अब शिकारा से रामटेक तक की मांग जोर पकड़ रही है।

इसी बीच उत्साही युवा संजय मण्डल के द्वारा सिवनी से कटंगी को रेल मार्ग से जोड़ने का सुझाव दिया है। इस सुझाव का स्वागत किया जाना चाहिए। दरअसल, रेल्वे के द्वारा उन स्थानों पर नई लाईन डालने का काम तेजी से किया जाता है जहां रास्ता सुलभ हो और रेल्वे को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में कम दूरी तय करना पड़े। जाहिर है इससे रेल्वे का ईंधन या बिजली कम खर्च होगी और रेल्वे पर आर्थिक बोझ कम होगा।

रामटेक से गोटेगांव या शिकारा से रामटेक तक रेल खण्ड का निर्माण होना चाहिए। इससे नागपुर और जबलपुर (मूलतः दक्षिण भारत से उत्तर भारत) के बीच रेल की दूरी कम होगी। इसके लिए धूमा घाट, बंजारी घाट सहित कुरई घाट पर रेल्वे को पुलों का निर्माण कराना होगा।

वर्तमान में कटंगी से तिरोड़ी होकर नागपुर एवं नैनपुर से जबलपुर तक का रेलखण्ड लगभग तैयार स्थिति में है। इसका कुछ हिस्सा जल्द ही तैयार हो जाएगा। ऐसी स्थिति में अगर कटंगी से सिवनी के बीच महज 40 किलोमीटर की दूरी में रेल्वे की पातें बिछा दी जाती हैं तो नागपुर से जबलपुर की दूरी फिलहाल कम की जा सकेगी।

बालाघाट सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन रेल्वे के अमान परिवर्तन या सिवनी को रेल्वे के मामले में समृद्ध करने के लिए प्रयासरत दिख रहे हैं। डॉ. बिसेन चार बार विधायक रह चुके हैं। वे प्रदेश में लंबे समय तक मंत्री भी रहे हैं। उन्हें लंबा प्रशासनिक अनुभव भी है। इस लिहाज से डॉ. ढाल सिंह बिसेन से अपेक्षा की जा सकती है कि सिवनी से कटंगी के बीच नया रेलखण्ड बनाए जाने की मांग अगर उनके द्वारा पुरजोर तरीके से रखी जाती है तो इस छोटे से हिस्से को जोड़कर रेल्वे न केवल अपना ईंधन बचाएगा वरन नागपुर से इटारसी और इटारसी से जबलपुर के बीच के यातायात के दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन सहित संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह से भी जनापेक्षा है कि वे भी इस तरह का प्रस्ताव तैयार करवाकर उचित माध्यमों से रेल मंत्रालय को भिजवाएं ताकि इसे अमली जामा पहनाया जा सके। वैसे नागपुर से छिंदवाड़ा, सिवनी, नैनपुर होकर जबलपुर के रेल खण्ड का उपयोग कर दूरी कम करने की बात भी भविष्य में सामने आए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए!

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