शिक्षक के उपचार से युवक की मौत!

 

 

झोलाछाप पर नियंत्रण नहीं रहा सीएमएचओ का!

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। जिले में झोला छाप चिकित्सकों की बाढ़ आयी हुई है। इन पर नियंत्रण के लिये जवाबदेह मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के द्वारा महज़ रस्म अदायगी ही की जा रही है। इसका एक ताजा उदाहरण उगली क्षेत्र में शिक्षक द्वारा अपना मूल काम छोड़कर बिना किसी वैध डिग्री के उपचार किया जा रहा है, जिससे एक युवक को असमय ही काल के गाल में समाने पर मजबूर होना पड़ा।

केवलारी विकासखण्ड के उगली क्षेत्र में इन दिनों झोला छाप चिकित्सकों की पौ बारह है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि सीएमएचओ न ही खण्ड चिकित्सा अधिकारी के द्वारा क्षेत्र में झोला छाप चिकित्सकों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नहीं की जा रही है, जिससे झोला छाप चिकित्सकों के हौसले बुलंदी पर हैं।

ग्रामीणों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पेशे से शिक्षक घनश्याम देशमुख के द्वारा शाला में महज़ उपस्थिति दर्ज कराकर क्षेत्र में लोगों का उपचार किया जा रहा है। ग्रामीणों की मानें तो घनश्याम देशमुख के द्वारा गाँव – गाँव घूमकर मरीज़ों का उपचार भी किया जाता है।

ग्रामीणों ने आगे बताया कि गत दिवस उक्त शिक्षक एवं तथा कथित झोलाछाप चिकित्सक घनश्याम देशमुख के द्वारा सकरी ग्राम निवासी पवन (19) पिता सुनील तिलेश्वर का उपचार किया गया था। उपचार के दौरान हालत बिगड़ने पर पवन को बालाघाट ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया।

बताया जाता है कि इसके बाद यह बात गाँव में तेजी से चली कि उक्त झोला छाप चिकित्सक के द्वारा इस मामले में बीएमओ और सीएमएचओ कार्यालय में अपनी पहुँच के जरिये मामले को रफा दफा करवा दिया गया। इस मामले में जब शिक्षक घनश्याम देशमुख से पूछा गया तो पहले तो उनके द्वारा इस तरह के उपचार से साफ इंकार कर दिया गया, पर बाद में उनके द्वारा उपचार की बात को स्वीकारते हुए दबंगता के साथ यह भी कहा गया कि उनके द्वारा सबको सेट कर लिया गया है अब कोई भी उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है।

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल से जब चर्चा की गयी तो उन्होंने कहा कि अगर कोई शिक्षक अपने मूल काम को छोड़कर दूसरा काम करता है तो यह नियमानुसार गलत है। उन्होंने कहा कि वे इसकी जाँच कर संबंधित शिक्षक के खिलाफ जल्द ही कार्यवाही करेंगे।

वहीं इस मामले में बीआरसी केवलारी ने कहा कि काफी दिनों से वे क्षेत्र के भ्रमण पर नहीं निकले हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि इस तरह से कोई शिक्षक अपना काम छोड़कर मरीज़ों का उपचार भी कर रहा है। इस मामले से क्षेत्र में शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान अवश्य लगने आरंभ हो गये हैं।

इस तरह का एक मामला जाँच में है. पवन तिलेश्वर का निधन कैसे हुआ, इस बारे में जाँच के बाद ही पता चलेगा. शिक्षक घनश्याम देशमुख प्राथमिक शिक्षक हैं. उनके पास भोपाल की किसी संस्था का डिप्लोमा है.

हेमंत बावरिया,

थाना प्रभारी, उगली.

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