बाहर से आने वाले चिकित्सकों को मिली छूट!

 

 

बिना पंजीयन उपचार कर रहे चिकित्सकों में शामिल नहीं प्रवासी चिकित्सक!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। लगातार दो माहों से संवेदनशील जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं को पटरी पर लाने की कवायद भले ही की जा रही हो पर स्वास्थ्य विभाग में अंगद के मानिंद पैर जमा चुके वे चिकित्सक जो प्रशासनिक पदों पर पदस्थ हैं के द्वारा जिलाधिकारी की मंशाओं पर पानी फेरा जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सीएमएचओ कार्यालय में पंजीयन न कराने वाले 45 चिकित्सकों को नोटिस जारी किया गया है। लगभग दो माह पहले जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा सीएमएचओ को दो दिन में चिकित्सकों को पंजीयन कराने के निर्देश दिये गये थे। बाद में सीएमएचओ के आग्रह पर इस अवधि को 15 दिन के लिये बढ़ा दिया गया था।

सूत्रों का कहना है कि सीएमएचओ एवं चिकित्सकों के साथ हुई बैठक में जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा अपने मोबाईल पर सरकारी अस्पताल में मरीज़ देखे जाने के समय पर निजि तौर पर चिकित्सा किये जाने के कुछ फोटो भी चिकित्सकों को दिखाये गये थे। उस समय जिलाधिकारी के तेवर बहुत ही तल्ख नज़र आ रहे थे।

सूत्रों ने कहा कि शहर में अधिकांश चिकित्सकों के द्वारा बिना पंजीयन कराये ही जिलाधिकारी एवं सीएमएचओ के निर्देशों को धता बताते हुए अपने क्लीनिक्स को धड़ल्ले से जारी रखा गया है। पंजीयन कराने की प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों को सर्वप्रथम मेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निष्पादन करने वाली जिले में कार्यरत अधिकृत एजेंसी से पंजीयन करवाना पड़ता है।

सूत्रों की मानें तो इसके आधार पर जबलपुर में संचालित प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के कार्यालय द्वारा चिकित्सकों को प्रमाण पत्र जारी किये जाते हैं। जारी निर्देश व सूचना सार्वजनिक होने के बाद भी आज तक एक भी डॉक्टर ने अपना पंजीयन नहीं करवाया है। अधिकांश डॉक्टर्स अपनी मनमानी पर आमदा हैं।

मजे की बात तो यह है कि सीएमएचओ कार्यालय के द्वारा 45 चिकित्सकों को नोटिस जारी किया गया है, जबकि इससे अधिक तादाद में नागपुर से सिवनी आकर निजि चिकित्सकों के द्वारा मरीज़ों की जेब तराशी की जा रही है। इन चिकित्सकों के द्वारा महंगी ब्रांडेड दवाएं भी लिखी जा रही हैं। इस मामले में सीएमएचओ कार्यालय पूरी तरह मौन ही नज़र आ रहा है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि जिले भर में दो सैकड़ा से अधिक चिकित्सक निजि तौर पर क्लीनिक चलाकर चिकित्सा कर रहे हैं, इसके बाद भी महज़ 45 चिकित्सकों को नोटिस जारी किया जाना आश्चर्य जनक ही है। इसके अलावा नागपुर से आने वाले चिकित्सकों को संभवतः पंजीयन कराने से छूट प्रदाय की गयी है।

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