आदमखोर होने की राह पर सिवनी के आवारा कुत्ते!

 

नगर पालिका सिवनी का मवेशी प्रेम, नागरिकों के लिये दिन प्रतिदिन घातक साबित होता जा रहा है लेकिन इस दिशा में न तो नगर पालिका ध्यान देते हुए दिख रही है और न ही जिला प्रशासन इस पर कोई कार्यवाही करना चाह रहा है।

बारिश के इन दिनों में सिवनी की सड़कों पर आवारा घूमने वाले कुत्ते लोगों को भयाक्रांत किये हुए हैं। लोग, डरते हुए इनके समीप से गुजरकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हुए सहज ही देखे जा सकते हैं। इन आवारा कुत्तों के द्वारा कई लोगों को काटकर घायल कर दिये जाने के कारण लोग सहमे हुए हैं लेकिन नगर पालिका में बैठे मोटी चमड़ी वाले जिम्मेदारों पर इसका कोई असर होता हुआ नहीं दिख रहा है।

विवेकानंद वार्ड और हाल ही में आधुनिक कॉलोनी के राजीव नगर में आवारा कुत्तों के द्वारा काटकर लोगों को घायल किये जाने की गंभीर घटनाएं हुई हैं। नगर पालिका के द्वारा ऐसी घटनाओं के बाद आवारा कुत्तों को पकड़ने का स्वांग रचा जाता है। सवाल यह उठता है कि आवारा मवेशियों की सिवनी में बहार किसकी शह पर बनी हुई है।

कुत्ते ही नहीं आवारा साण्ड भी लोगों को घायल कर रहे हैं लेकिन नगर पालिका शांत बैठी हुई है। कुछ कुत्ते तो इतनी बुरी तरह लोगों पर झपटते हैं कि उससे उनके आदमखोर होने तक का अहसास होता है। जिस तरह शहर में नये-नये विक्षिप्तों की संख्या बढ़ती जा रही है उसी तरह यहाँ आवारा मवेशियों की धमाचौकड़ी भी बढ़ती जा रही है। देखने वाली बात यह है कि आवारा विक्षिप्त तो लोगों को ज्यादा परेशान नहीं कर रहे लेकिन आवारा मवेशियों से नागरिक जमकर परेशान हो चुके हैं।

सामान्य समय में आवारा कुत्ते या आवारा मवेशी जिनमें गाय, बैल, सूअर, गधे आदि आते हैं वे यदि लोगों को काटकर या सींग मारकर घायल न भी कर रहे होते हैं तब भी ये गंभीर सड़क हादसों का कारण तो बन ही रहे हैं लेकिन किसी भी संबंधित के द्वारा स्व संज्ञान से इस दिशा में ऐसी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसके द्वारा नागरिकों को राहत प्रदाय की जा सके।

इन परिस्थितियों के चलते उन बातों पर सहज ही यकीन होता है जिसमें कहा जाता है कि नगर पालिका या जिला प्रशासन के द्वारा उन्हीं कार्यों को तवज्जो दी जा रही है जिसमें कमीशन खाने की कोई गुंजाईश होती है। यदि वास्तव में ऐसा है तो नागरिकों के लिये यह दुःखद स्थिति है जो सिवनी में मुफ्त में वेतन पाने वाले कमीशनखोर अधिकारी आ जमे हैं, इसी श्रेणी में कई जन प्रतिनिधि भी कहे जा सकते हैं।

ऐसे अधिकारियों या जन प्रतिनिधियों मेें मानवीय दृष्टिकोण के न होने के कारण ही संभवतः विषम परिस्थितियां बनी हुई हैं। सिवनी के नागरिकों को कर्त्तव्यनिष्ठ जन प्रतिनिधि और अधिकारियों के लिये शायद अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा, परिस्थितियां देखकर ऐसा ही लग रहा है।

कमलेश शुक्ला

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