55 करोड़ का शौचालय घोटाला!

 

 

अब तक पाये गये 46 हजार शौचालय गायब!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में केंद्रीय इमदाद पर बनवाये गये शौचालयों की जाँच में अनेक हैरत अंगेज बातें सामने आ रही हैं। इनकी जाँच अगर करीने से करवायी जाये तो सिवनी में अरबों रूपये का शौचालय घोटाला सामने आ सकता है। फिलहाल जितने शौचालयों का सत्यापन किया गया है उनमें 46 हजार शौचालय जमीनी स्तर पर गायब मिले हैं।

जिला पंचायत के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पूर्व में शिवराज सिंह चौहान के नेत्तृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में अंधा पीसे कुत्ता खाये की कहावत को चरितार्थ करते हुए जिले में सरकारी योजनाओं का संचालन किया जाता रहा है। सिवनी में पदस्थ रहे जिलाधिकारियों के द्वारा भी अपनी जवाबदेही का निर्वहन कम से कम इस मामले में तो उचित तरीके से नहीं ही किया गया है।

सूत्रों ने बताया कि जिले भर में तीन लाख शौचालयों का निर्माण करवाया गया था। इन शौचालयों के निर्माण के उपरांत इनकी फोटो को मौके से ही जियो टेगिंग के जरिये अपलोड किया जाना चाहिये था। यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि जब शौचालय बने ही नहीं तो किन शौचालयों की तस्वीरों को किस लोकेशन से जियो टेगिंग के जरिये अपलोड कर दिया गया है।

सूत्रों ने कहा कि यह बात भी शोध का ही विषय है कि तत्कालीन जिलाधिकारियों, जिला पंचायत एवं जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित उपयंत्री आदि तकनीकि अफसरान के द्वारा बिना भौतिक सत्यापन के लक्ष्य पूरा करने के आंकड़े उच्चाधिकारियों को किस आधार पर भेज दिये गये थे!

सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार को जब शौचालयों के निर्माण में घालमेल की शिकायतें मिलीं तो सरकार के द्वारा स्थानीय स्तर पर लोगों को स्वेच्छाग्राही बनाया जाकर उनके जरिये शौचालयों के सत्याापन का काम आरंभ करवाया गया है। इसके तहत अब तक आधे से अधिक शौचालयों के सत्यापन में जिले में 46 हजार से ज्यादा शौचालय गायब पाये गये हैं।

ज्ञातव्य है कि एक शौचालय को बनाने में 12 हजार रूपये दिये जा रहे हैं। अब तक जिले में 46 हजार शौचालय गायब पाये गये हैं तो इस लिहाज़ से जिले में 55 करोड़ 20 लाख रूपये का घोटाला तो अब तक सामने आ ही चुका है। शेष बचे शौचालयों के बाद यह घोटाला पौन करोड़ रूपये तक पहुँच जाये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये।

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