स्वच्छंद विचरण कर रहे आवारा सूअर

 

 

गंदगी के साये में है सिवनी शहर

(प्रदीप खुट्टू श्रीवास)

सिवनी (साई)। नगर में सूअरों से लोग परेशान हैं। यहाँ आपको गली, मोहल्लों या दुकानों में पुरुष एवं महिलाएं डण्डा लेकर सूअर हांकते दिख जायेंगे।

नगर पलिका से लोगों ने शिकायत भी की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। नगर में आवारा सूअरों के बीच विचरण से फैल रही गंदगी से संक्रमण बीमारियों की आशंका के साथ ही स्वच्छता अभियान को भी पलीता लगा रहा है। नगर में आवारा सूअरों के विचरण से भारी गंदगी फैल रही है।

लोगों का कहना है कि गली मोहल्लों में गंदगी फैलने से नगर की सभी सड़कों पर गंदगी फैली रहती है। इसके चलते नगर में संक्रमण फैलने का खतरा लगातार ही बना हुआ है। सावन के मौसम में श्रृद्धालु लगभग रोजाना ही देवालयों में जाते हैं। इस दौरान आवारा मवेशी, गधे, सूअर आदि उन्हें परेशान करते ही नज़र आते हैं।

नगर में विभिन्न वार्डों मे लोग सूअरों से परेशान हैं। आये दिन ये जानवर सड़क पर तेजी से दौड़कर वाहनों से टकरा जाते हैं। किसी के घर में घुस जाते हैं, छोटे – छोटे बच्चों को दौड़ाकर काट लेते हैं और उन्हें नाली में गिरा देते हैं। नागरिकों के द्वारा कई बार शिकायत की गयी लेकिन नगर परिषद द्वारा सूअरों को पकड़े जाने के अभियान को उसके द्वारा ठण्डे बस्ते के हवाले ही कर दिया गया है।

शहर का शायद ही कोई ऐसा वार्ड होगा जहाँ गंदगी न पसरी हो। वार्ड की सफाई का जिम्मा पालिका का है। पालिका के द्वारा बारिश के समय मच्छरों से बचने के उपाय भी नहीं किये जा रहे हैं। पूरी गर्मी निगल गयी, किन्तु पालिका की फॉगिंग मशीन कहीं भी घूमती नहीं दिखी।

नगर पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि शहर में गाजर घास पूरी तरह आच्छादित होती जा रही है। गाजर घास को बढ़ने से रोकने लिये जिस रसायन का छिड़काव किया जाता है उसे पालिका के द्वारा हर साल भारी तादाद में खरीदा तो जाता है किन्तु इसका उपयोग कहाँ किया जाता है इस बारे में शायद ही कोई जानता हो।

बारिश के मौसम में आवारा मवेशी, कुत्ते, गधे और सूअर आदि पानी से बचने के लिये लोगों के घरों, प्रतिष्ठानों आदि के बरामदे में शरण लेते हैं। रात के समय सूखे स्थानों पर बैठे इन जानवरों के द्वारा सुबह होते ही उसी स्थान पर मल मूत्र का त्याग कर दिया जाता है, जिसके चलते लोग सुबह से ही इसे साफ करते दिख जाते हैं।

जानकारों का कहना है कि बारिश का मौसम श्वानों के लिये प्रजनन का मौसम माना जाता है। इस दौरान कुत्ते टोलियों में घूमते दिखते हैं, कई बार ये हिंसक भी हो उठते हैं। सुबह सवेरे स्कूल जाने वाले बच्चों को इनसे सबसे ज्यादा खतरा प्रतीत होता है। देर रात श्वानों में होने वाले संघर्ष की कर्कश आवाजें भी लोगों को डराती दिखती हैं।

शहर में घरों से कचरा उठाने के लिये की गयी व्यवस्था भी दम तोड़ती ही दिख रही है। वार्डों से कचरा उठाने वाले छोटे वाहनों से कचरा सड़क पर गिरता दिख जाता है। कचरा एकत्र करने के लिये जिन स्थानों पर पात्र रखे गये हैं उन स्थानों पर भी रोज कचरा न उठ पाने से कचरे से उठने वाली दुर्गंध लोगों को परेशान करती नज़र आती है। लोगों ने संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के ध्यानकर्षण की जनापेक्षा व्यक्त की है।

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