कब मिलेगा क्रिकेट स्टेडियम!

 

 

(लिमटी खरे)

खेल के मामले में सिवनी समृद्ध नहीं माना जा सकता है। यह आलम तब है जबकि सिवनी से प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की अनेक प्रतिभाएं निकलकर सामने आयी हैं, जिन्होंने सिवनी का नाम रौशन किया है। सिवनी में खेल के प्रति उत्साह का भी अभाव साफ दिखायी दे रहा है।

प्रौढ़ हो रही पीढ़ी के जहन में आज भी बाबा राघवदास हॉकी स्पर्धा की यादें ताजा होंगी। इस प्रतियोगिता में देश भर की नामी टीमें सिवनी में आकर अपना जौहर दिखाया करती थीं। सिवनी में हॉकी के अभ्यास के लिये कोतवाली के सामने अभ्यास शाला का मैदान हुआ करता था। अभ्यास के दौरान यहाँ इस कदर भीड़ जुट जाया करती थी मानो कोई प्रतियोगिता चल रही हो। यह आलम पूरे साल भर देखने को मिलता था। अब यह बात इतिहास की बात हो चुकी है।

इसी तरह फुटबाल के लिये मिशन स्कूल का वह मैदान जिसमें प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है खिलाड़ियों के लिये मुफीद हुआ करता था। मिशन स्कूल की बाउंड्री वाल पर दर्शक घण्टों बैठकर फुटबाल की प्रेक्टिस को देखकर आनंद लिया करते थे। दर्शकों की उपस्थिति में खिलाड़ियों का उत्साह वर्धन भी जमकर होता था।

बात टेनिस की हो तो टेनिस को शुरूआत से ही रईसों का खेल माना जाता रहा है। सिवनी में टेनिस की प्रेक्टिस कंपनी गार्डन में बने मैदान पर हुआ करती थी। यह आम लोगों की पहुँच से दूर हुआ करता था, इसलिये यहाँ भीड़ दिखायी ही नहीं देती थी। इसके अलावा बास्केट बाल के मामले में बड़े मिशन स्कूल के पीछे वाले मैदान पर अभ्यास हुआ करता था।

क्रिकेट का खेल भी युवाओं के प्यारे शगल में शामिल रहा है। सिवनी में क्रिकेट के अभ्यास के लिये कोई भी स्थान न होने के कारण जिला अस्पताल के अंदर के मैदान जिसे होमगाडर््स मैदान कहा जाता था में अभ्यास किया जाता था। इस मैदान पर अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। अब इस स्थान पर नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र का भवन बना दिया गया है।

नब्बे के दशक के उपरांत हॉकी के लिये एस्ट्रोटर्फ तो फुटबाल के लिये स्टेडियम मैदान है। शेष खेलों के लिये न तो स्टेडियम है न ही कोई और स्थान। अब समस्या यह है कि क्रिकेट के शौकीन खिलाड़ी कहाँ जाकर अभ्यास करें। लिये दिये पॉलीटेक्निक मैदान ही बचता है। इस मैदान पर खेलना भी पॉलीटेक्निक प्रशासन के रहमो करम पर ही निर्भर करता है।

जिले में जिला क्रिकेट संघ (डीसीए) अस्तित्व में है। डीसीए के अध्यक्ष पद पर लगभग एक दशक से ज्यादा समय से वर्तमान जिला काँग्रेस अध्यक्ष राज कुमार खुराना विराजमान हैं। डीसीए के द्वारा अब तक जिले में क्रिकेट की प्रतिभाओं को निखारने के लिये एक अदद मैदान तक मुहैया न कराया जाना वाकई में आश्चर्य जनक ही माना जायेगा।

याद पड़ता है जब हम दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे थे, उस दौरान जब सिवनी आना हुआ तब पॉलीटेक्निक मैदान पर तत्कालीन जिला कलेक्टर मनोहर दुबे से तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक रमन सिंह सिकरवार की उपस्थिति में पॉलीटेक्निक मैदान पर ही क्रिकेट के मैदान के संबंध में चर्चा के दौरान मनोहर दुबे ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि डीसीए मैदान के लिये सरकारी भूमि देख ले वे उसे क्रिकेट स्टेडियम के लिये आवंटित कर देंगे। उन्होंने यह बात अपने उद्बोधन में भी कही थी।

विडंबना ही कही जायेगी कि इतने सालों बाद भी डीसीए के द्वारा जिले के क्रिकेट में रूचि रखने वाले खिलाड़ियों को अभ्यास के लिये एक अदद मैदान भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। डीसीए के पदाधिकारियों से जब भी चर्चा की जाती है तो लकीर के फकीर बनते हुए सदस्यों के द्वारा यह कह दिया जाता है कि खिलाड़ियों के लिये अभ्यास शिविर लगाये जाते हैं। जिला स्तर पर प्रतियोगिताएं कराये जाने का काम डीसीए का नहीं है।

जिला हॉकी संघ के प्रयासों से जिले में हॉकी के खिलाड़ियों के लिये एस्ट्रोटर्फ का मैदान मिला है। वहीं फुटबाल संघ के प्रयासों से स्टेडियम में फुटबाल की गतिविधियां होती हैं। ये दोनों ही मैदान इन दोनों ही संघों की जागरूकता के कारण सालों बाद भी न केवल अस्तित्व में हैं वरन मैंटेंड हैं।

पता नहीं क्यों डीसीए के द्वारा अब तक क्रिकेट के मैदान के लिये प्रयास नहीं किये गये हैं। हमारा कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि प्रयास नहीं हुए होंगे पर अब तक स्टेडियम अगर नहीं बन पाया यहाँ तक कि जगह को भी चिन्हित नहीं किया जा सका है तो निश्चित तौर पर यह डीसीए की असफलता से ज्यादा कुछ नहीं माना जा सकता है। इस संबंध में विलंब के लिये डीसीए इस टिप्पणी के प्रकाशन के बाद हो सकता है अपना पक्ष रखे पर डीसीए के द्वारा विलंब क्यों कारित किया गया इसका दिन वार ब्यौरा अगर दिया जाये तो उचित होगा वरना सब कुछ बेमानी ही माना जायेगा।

जिले में मेडिकल कॉलेज के लिये भूखण्ड मिल सकता है, थोक सब्जी मण्डी के लिये भूखण्ड मिल सकता है पर नहीं मिल सकता है तो क्रिकेट के खिलाड़ियों के लिये स्टेडियम के लिये भूखण्ड! दो ढाई दशकों में जितने खिलाड़ी 12 साल की आयु से अब 30 या 32 साल की आयु में पहुँच चुके होंगे उनके जौहर को न निखार पाने के लिये क्या डीसीए के पदाधिकारी नैतिक जिम्मेदारी लेंगे!

वर्तमान में प्रदेश में काँग्रेस की सरकार सत्तारूढ़ हुए सात माह से ज्यादा का समय बीत चुका है। जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष ही वर्तमान में जिला काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं। इस लिहाज़ से कार भी आपकी सरकार भी आपकी, अब विलंब का क्या कारण है!

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