गुरू भारतीय संस्कृति की देन : डेहरिया

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। गुरू भारतीय संस्कृति की देन है पश्चिम के देशों में न तो ऐसी कोई साधना थी और न ही ऐसी कोई खोज उनके पास अभी पश्चिम के देशों में गार्ड और गाईड तो मिलेगा टीचर भी मिलेगा पर गुरूत्व को दर्शाने वाला उनके पास कोई शब्द नहीं है। गुरू शब्द की अपनी गरिमा है परंपरा है, गुरू सिर्फ शब्द, ज्ञान ही नहीं देता बल्कि भाव भाषना देकर जीवन जीने की शैली भी प्रदान करता है।

उक्त उदगार महर्षि विद्या मंदिर में आयोजित गुरू पूर्णिमा पर्व के अवसर पर प्राचार्य अशोक डेहरिया ने व्यक्त किये। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन प्रियल राहंगडाले, एकता तमेरे ने किया कार्यक्रम के प्रारंभ में भावातीत ज्ञान के प्रणेता महर्षि महेश योगी के चित्र के समक्ष गुरू पूजन किया गया।

इस दौरान बच्चों ने अनेक गीतों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिवार के सभी शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस दौरान जिन बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में शामिल होकर स्थान पाया था उन्हें सम्मानित किया गया। आयोजन के दौरान मनीष शर्मा एवं विद्यालय परिवार के समस्त स्टॉफ का सहयोग रहा। इस दौरान एकल गायन तू ही तो जन्नत मेरी की प्रस्तुति की सभी ने सराहना की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संजय जैन उपस्थित रहे।