गुरू पूर्णिमा : हुआ गुरूओं का सम्मान

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। गुरू शब्द भारतीय संस्कृति की देन है, पाश्चात्य देशों में ऐसा कोई शब्द नहीं है। गुरू मोमबत्ती के समान स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है।

उक्ताशय के उदगार सेवा निवृत्त शिक्षक आर.के. जैन द्वारा गुरू पूर्णिमा के अवसर पर मिशन बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में छात्र, छात्राओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किये गये। इसी के अंतर्गत भूतपूर्व प्राचार्य एवं शिक्षक पी.आर. अर्जुनवार ने अपने उदबोधन में गुरूओं को विद्यालय की आत्मा निरूपित किया।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष भी बड़े मिशन स्कूल में गुरू पूर्णिमा का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत शाला के भूतपूर्व शिक्षकों एवं प्राचार्यों का तिलक लगाकर तथा श्रीफल व रूमाल देकर सम्मान किया गया। माँ सरस्वती के छायाचित्र पर अतिथियों द्वारा माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्ज्वलन के बाद शाला की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।

शाला के प्राचार्य अजय प्रभाकर ढवले ने अपने उदबोधन में गुरू की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित विद्यार्थियों से अपील की कि सनातन धर्म में गुरू का स्थान सर्वोपरि होने के कारण उन्हंे अपने हृदय में उचित स्थान देते हुए आदर दिया जाये। उन्होंने एक छोटी सी कहानी के द्वारा बच्चों को कहानी का सार बताते हुए स्मरण दिलाया की रिश्ते नाते, पद, धन, ऐश्वर्य के मद को भूलकर हमें अपने गुरू को सर्वोपरि मानते हुए आदर करना चाहिये।

शाला के सेवा निवृत्त व्याख्याता अमर बी.सिंह ने अपने उदबोधन में बच्चांे को बताया की यदि गुरू शिष्य का हाथ थाम ले तो वह उसे शिखर पर ही पहुँचाता है इसलिये हमें गुरू का हाथ थाम कर उच्च शिखर पर पहुँचने का प्रयास करना चाहिये।

उक्त कार्यक्रम में शाला के भूतपूर्व शिक्षक जी.एस. ठाकुर, आर.के. जैन, व्ही.के. कौशल, पी.आर. अर्जुनवार, आर.पी. कोहरू, अमर बी. सिंह एवं एस.के. जैन, उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन शाला के शिक्षक अमीन यू. खान ने किया एवं शाला की शिक्षिका एम.एस.सिंह एवं अनीता तिवारी ने सफल मंच संचालन किया।

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