लखनादौन मामले में हर पहलू पर हो जाँच!

 

 

(लिमटी खरे)

बुधवार को सिविल अस्पताल लखनादौन में हुए वाकये के बाद दो चिकित्सकों, डॉ.वीथी जैन और डॉ.जे.पी.एस. परतेती को संभागायुक्त के द्वारा जिलाधिकारी की अनुशंसा पर निलंबित कर दिया गया है। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात से लेकर बुधवार को दोपहर तक जो कुछ भी हुआ उसके लिये उच्च स्तरीय जाँच समिति बनायी जाना चाहिये, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का समावेश न हो। दरअसल लखनादौन में जो कुछ हुआ उसकी विस्तृत जाँच करवाये जाने की आवश्यकता इसलिये भी है क्योंकि अधिकारियों के द्वारा इस विवाद को रोका जा सकता था। इसके अलावा सर्पदंश पीड़ितों को समय पर उपचार भी मिलने की गुंजाईश सारे घटनाक्रम को देखते हुए लग रही है।

0 सालों से यह व्यवस्था देखने को मिलती आयी है कि दिन या रात में जिस भी चिकित्सक की कॉल ड्यूटी होती है उस चिकित्सक के लिये बकायदा कॉल बुक में कॉल लिखा जाकर एक संदेश वाहक के जरिये सरकारी वाहन को उस चिकित्सक को घर से लाने और ले जाने का काम किया जाता है। कमोबेश यही व्यवस्था जिला अस्पताल में भी सालों से चल रही है। इस लिहाज़ से लखनादौन सहित समस्त पीएचसी, सीएचसी आदि में यह व्यवस्था होगी ही।

0 क्या कारण है कि विकास खण्ड चिकित्सा अधिकारी लखनादौन के द्वारा कॉल ड्यूटी के लिये वाहन की व्यवस्था नहीं की गयी! क्या कारण है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ अन्य अधिकारियों के निवास पर वाहनों की कतार लगी रहती है। क्या जिला प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) के द्वारा इस दिशा में कभी देखने की जहमत उठायी गयी है! क्या सीएमएचओ और डीएचओ के पद पर बैठे प्रभारी अधिकारियों ने कभी इस बात की समीक्षा की, अगर नहीं तो क्यों?

0 यह बात भी विचारणीय ही है कि डॉ.वीथी जैन महिला हैं, वे रात में अकेले बार – बार अस्पताल कैसे आ-जा सकतीं हैं! जाहिर है कि महिला और पुरूष कोई भी चिकित्सक हो उसके लिये दिन हो या रात कम से कम व्यवस्थाओं के तहत कॉल वाहन भेजा जाना चाहिये, पर लखनादौन में ऐसा नहीं किया गया!

0 इसके अलावा डॉ.जे.पी.एस. परतेती के मामले में भी अनेक बातें निकलकर सामने आ रही हैं। डॉ.परतेती 17 जुलाई को अगर अस्पताल में अनुपस्थित थे तो हाज़िरी रजिस्टर में उनकी गैर हाजिरी लगा दी जाती। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन्हें अवैतनिक किया जा सकता था, पर ऐसा न किया जाकर प्रभारी सीएमएचओ डॉ.के.सी. मेश्राम और प्रभारी डीएचओ डॉ.एम.एस. धर्डे उसी सुबह डॉ.परतेती के निवास पर जा पहुँचे। इसकी बजाय अगर किसी भृत्य को भेजकर उन्हें अस्पताल बुलवाया जाता तो भी समझा जा सकता था। सीएमएचओ और डीएचओ के द्वारा जो किया गया उसे देखकर यही प्रतीत होता है जिस तरह पुलिस के द्वारा किसी का वारंट तामील करवाया जाता है, उसी तरह ये दोनों अधिकारी डॉ.परतेती का वारंट लेकर तामीली करवाने गये थे। यह बात सोशल मीडिया में चल रहे वीडियो में साफ तौर पर दिखायी दे रही है।

0 डॉ.परतेती के बारे में सीएमएचओ ने कहा कि वे शराब के आदी हैं। शराब पीना किसी भी व्यक्ति का नितांत निजि मामला हो सकता है। अगर वे शराब के आदी थे तो क्या इसके पहले सीएमएचओ के द्वारा डॉ.परतेती को कभी इस बारे में ताकीद करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया! अगर किया गया तो उस नोटिस को उनके द्वारा प्रशासन के समक्ष अवश्य रखा जाना चाहिये।

0 प्रश्न यही है कि क्या वे शराब पीकर अपने कर्त्तव्य पर उपस्थित हुए थे! जाहिर है नहीं वे अपने निवास पर आराम फरमा रहे थे, फिर किस अधिकार के तहत अधिकारीद्वय उनके निवास पर गये! देखा जाये तो जिला प्रशासन के द्वारा इस पूरे प्रकरण के इस एंगल को भी संभागायुक्त के समक्ष रखा जाना चाहिये था।

0 वहीं न्यू बहुउद्देशीय कर्मचारी संघ की विज्ञप्ति के अनुसार पूरे विवाद में पहला झापड़ प्रभारी डीएचओ डॉ.एम.एस. धर्डे के द्वारा मारा गया है। अगर यह सही है तो शासकीय सेवक की सेवा शर्तों का अध्ययन किया जाना भी जरूरी है कि क्या इन सेवा शर्तों में किसी कर्मचारी या अधिकारी को मारने का अधिकारी किसी को दिया गया है।

0 यहाँ एक बात और आश्चर्यजनक ही मानी जायेगी, वह यह कि डॉ.एम.एस. धर्डे द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी हैं। उन्हें किस आधार पर डीएचओ 01 बना दिया गया है। डॉ.धर्डे के खिलाफ एक महिला कर्मचारी ने संगीन आरोप भी लगाये हैं, वे जमानत पर चल रहे हैं। इसके बाद भी द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के द्वारा क्या प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी की जाँच की जा सकती है या प्रथम श्रेणी अधिकारी को निर्देश दिये जा सकते हैं!

0 इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की जमकर भद्द पिट रही है। सोशल मीडिया में तो यहाँ तक लिखा जा रहा है कि मरीज़ के उपचार में अगर भूल से भी कोताही हो जाये तो डॉक्टर, सबसे पहले मरीज़ों के परिजनों के कोप का भाजन बनता है। वहाँ से अगर बच जाये तो फिर इस तरह के बाउंसर से पिटने से कैसे बच पायेगा डॉक्टर!

0 डॉ.वीथी जैन और डॉ.जे.पी.एस. परतेती के निलंबन का मसला विभागीय है, इस मामले में उच्चाधिकारियों ने अपने विवेक से निर्णय लिया होगा पर संभागायुक्त से अपेक्षा है कि वे यहाँ वर्णित पहलुओं पर विचार अवश्य करें और उसके बाद प्रभारी सीएमएचओ डॉ.के.सी. मेश्राम एवं प्रभारी डीएचओ डॉ.एम.एस. धर्डे की कार्यप्रणाली की जाँच अवश्य करायें . . .!

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