गंदा पानी पीकर हो रहे लोग बीमार!

 

 

बारिश में उल्टी-दस्त के बढ़े मरीज़़

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। बारिश जैसे ही होती है वैसे ही उल्टी दस्त की बीमारी से पीड़ित लोगों की आमद अस्पतालों में बढ़ जाती है। इसका कारण दूषित जल का सेवन ही प्रमुख माना जाता है। स्थानीय निकायों के द्वारा किस तरह जल शोधन किया जा रहा है यह शोध का ही विषय है!

बारिश के इस मौसम में कभी कभार पानी गिरने से दूषित पानी पीने के चलते उल्टी दस्त के मरीज़़ों की संख्या में विस्फोटक बढ़ौत्तरी दर्ज की जा रही है। जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र सहित निजि अस्पतालों और दवाखानों में उल्टी दस्त के मरीज़़ों की तादाद देखकर इसकी भयावहता का अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है। जिला चिकित्सालय में आईसोलेशन वार्ड में मरीज़़ों को भर्त्ती करने के लिये स्थान तक नहीं शेष रह गया है। यहाँ किसी किसी गाँव के एक-दो मरीज़ तो कहीं अनेक मरीज़ भी भर्त्ती हैं।

दरअसल, बारिश के चलते नदी नालों में स्थान – स्थान का पानी बहकर आ रहा है और इसी दूषित पानी का सेवन लोग कर रहे हैं। नल-जल योजना के जरिये जिन ग्रामों में पानी का प्रदाय किया जा रहा है वहाँ जल शोधन में लापरवाही बरती जा रही है, जिसके परिणाम स्वरूप यह स्थिति बन रही है।

इसके साथ ही बारिश थमने के बाद खुले मौसम में दिन के समय गर्मी व रात के समय हल्की ठण्ड पड़ने से भी लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड के 24 पलंग जहाँ मरीज़ों से फुल हैं वहीं अधिक संख्या में मरीज़ों के पहुँचने पर मरीज़ों को जमीन में गद्दा बिछाकर उनका उपचार किया जा रहा है। अधिक संख्या में मरीज़ों के पहुँचने पर वार्डों में ड्यूटीरत नर्सों को भी उपचार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल में शहर समेत जिले भर से उल्टी – दस्त से ग्रसित मरीज़ों के भर्त्ती होने पर शिशु व आईसोलेशन वार्ड अक्सर मरीज़ों से फुल रहते हैं। वार्ड में पेट दर्द, उल्टी – दस्त से ग्रसित मरीज़ों की संख्या सबसे ज्यादा है।

चिकित्सकों का कहना है कि बारिश में अक्सर मटमैला व दूषित पानी मिलता है। स्वच्छ पानी का ही सेवन करन चाहिये। इसके लिये पानी को शद्ध करने के लिये या तो उसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में निःशुल्क मिलने वाली दवा को डाला जाये या फिर पानी को उबालकर उसे ठण्डा करने के बाद पीना चाहिये।

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