ब्रेकअप के बाद ब्लैकमेल करे लड़का तो अपनाए यह तरीका

 

 

 

(शुभम त्रिपाठी)

शाहिद कपूर और कियारा आडवानी के अभिनय से सजी कबीर सिंह दर्शकों को बेहद पसंद आई है तो इसने एक बहस को जन्म भी दिया कि क्या ब्रेकअप से निपटने का वही एक तरीका है, जो कि कबीर सिंह ने अपनाया था? एक्सपर्ट्स इसे ब्रेकअप के बाद होने वाला डिप्रेशन और बीमारी बताते हैं। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि लड़कियों को ऐसी स्थिति में कभी लड़के के करीब दोबारा नहीं जाना चाहिए बल्कि स्थिति का मुकाबला करना चाहिए. . .

कबीर सिंह अपनी गर्लफ्रेंड प्रीति से उसके पैरंट्स की मर्जी के खिलाफ शादी करना चाहता है। जबकि प्रीति अपने पैरंट्स के खिलाफ नहीं जा पाती। ऐसे में, वह न सिर्फ खुद को बर्बाद करने की ठान लेता है बल्कि प्रीति के घर जाकर भी तमाशा करता है। वह चाहता है कि प्रीति अपने पैरंट्स के खिलाफ जाकर उससे शादी कर ले। जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कोई शख्स ऐसी किसी जबरदस्ती वाली रिलेशनशिप में रहता है तो उसमें आत्मसम्मान की भावना बेहद कम हो जाती है। मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. प्रकृति पोद्दार कहती हैं, अपने पार्टनर के साथ अच्छा वक्त बिताने के बाद अलग होते वक्त अगर आप उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं तो मान लीजिए कि आप अंदर से बहुत कमजोर हैं। अगर कोई लड़की/लड़का इस तरह के रिलेशनशिप में हैं तो उनके अंदर आत्मसम्मान की भावना बेहद कम है। ऐसे मामलों में लड़की को बिल्कुल भी अपनी चिंता नहीं जाहिर करनी चाहिए और न ही कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे लड़का उनका फायदा उठाए। यह भी जरूरी नहीं है कि उसकी हरकतों को देखते हुए आप कोई ऐसा फैसला लें, जैसे सब लोग लेते हैं। किसी शख्स की दूसरे को फोर्स करने की इस प्रॉब्लम को बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसॉर्डर कहते हैं। इस तरह के व्यवहार को नार्सिसिस्टिक बिहेवियर कहा जाता है। लड़कों के इस तरह के व्यवहार की एक वजह हमारी सोसायटी का ढांचा भी है। हमारे यहां पैतृक सोसायटी का ताना-बाना है, जिसमें लड़के को लगता है कि कोई लड़की मुझे मना कैसे कर सकती है या ब्रेकअप कैसे कर सकती है। अगर इस तरह की सोच बदल जाए तो काफी सुधार हो सकता है। जहां तक बात है कि ऐसी स्थिति में लड़का या लड़की डिप्रेशन में आने से कैसे बचें तो अगर उसे या उसके करीबी को लगता है कि हालात काबू नहीं हो रहे हैं तो दोनों को किसी अच्छे थैरपिस्ट के पास जाना चाहिए।

महिलाओं के मुद्दों पर काम करने वाली समाज सेविका रंजना कुमारी के अनुसार, लड़कों के लड़कियों के साथ जबर्दस्ती करने की समस्याएं हमेशा से समाज का हिस्सा रही हैं। वह कहती हैं, हम चाहे जितना भी सशक्तिकरण की बात कर लें लेकिन आज भी महिलाओं के पास उतनी ताकत नहीं है और न ही कोई उन पर भरोसा करता है। अगर लड़कियां अपनी स्थिति को स्पष्ट करना भी चाहें तो भी लोग उनका भरोसा नहीं करते हैं। आप मीटू मूवमेंट को ही देख लीजिए कि जब शिकायत की गई तो लोग कह रहे थे कि इतनी पुरानी बात क्यों की जा रही है। तो आज भी समाज में उनकी परिस्थितियों को समझने की कोशिश नहीं की जाती है, बल्कि उन्हें ही दोषी ठहराया जाता है। ऐसे में लड़कियां कई बार चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती हैं। वह आगे कहती हैं, अब जो ऑनलाइन स्पेस है, उसका बहुत दुरुपयोग हो रहा है लेकिन उसे लेकर कोई सख्त कानून नहीं है। पुराने कानूनों की व्यवस्था से ही उसे चला रहे हैं। ऐसे में बस यही रास्ता बचता है कि सबसे पहले पुलिस को सूचित किया जाए। फिर किसी सामाजिक संस्था से भी संपर्क में रहना चाहिए। इनमें एक और चीज जो सबसे जरूरी है कि अपने परिवार में सबकुछ बहुत ही स्पष्टता से बताना चाहिए। परिवार में भी लड़कियों के प्रति सहनशीलता बढ़नी चाहिए। मेरा मानना है कि सिर्फ कहने या बात करने भर से ही महिला सशक्तिकरण नहीं होगा। बल्कि उसके लिए काम करना होगा और सोच भी बदलनी होगी।

(साई फीचर्स)