आपत्ति व्यक्त करो तो मिलती है रेफर किये जाने की धमकी!

 

 

जिला चिकित्सालय प्रबंधन से मुझे शिकायत है जहाँ चिकित्सक तो समय पर मिलते नहीं हैं और जो स्टाफ ड्यूटी पर तैनात रहता है उनमें से भी अधिकांश का रवैया मरीज़ों के साथ ही साथ उनके परिजनों के साथ भी अत्यंत दोयम दर्जे का रहता है।

यहाँ पदस्थ स्टाफ को यह गंभीरता से सोचना चाहिये कि चिकित्सालय परिसर में कोई शौकिया तो नहीं ही आता है। ग्रामीण क्षेत्रों से आये हुए मरीज़ और उनके परिजन वैसे ही परेशान रहते हैं, ऊपर से यहाँ वार्डों में तैनात अधिकांश नर्सों का रवैया उनके प्रति कतई उचित नहीं कहा जा सकता है। चिकित्सकीय सलाह देने की बजाय वे मरीज़ को घुड़स कर भगा तक देतीं हैं। ऐसे में मरीज़ अपनी परेशानी किससे जाकर कहेगा क्योंकि चिकित्सक तो हमेशा वार्ड में रहते नहीं हैं।

देर रात को जब कोई मरीज़ चिकित्सालय में उपचार करवाने के लिये पहुँचता है तो उसे काफी देर तक तो यह बताया ही नहीं जाता है कि डॉक्टर कहाँ हैं और वे कब उपचार आरंभ करेंगे। देखने में आता है कि रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान कई चिकित्सक राउंड के उपरांत अपने रूम में जाकर सो जाते हैं जो काफी मशक्कत के बाद ही आपात स्थिति में उठते हैं। कई बार तो चिकित्सक के द्वारा परीक्षण करवाये जाने की बजाय ड्यूटी पर उपलब्ध नर्सों के द्वारा ही उपचार आरंभ कर दिया जाता है जिसे सही नहीं माना जा सकता है।

यही नहीं बल्कि ये नर्सें मरीज़ से उसका हाल पूछने आने वाले परिचितों को भी डपटकर निर्देश देती रहती हैं। इसके चलते यह भी कहा जा सकता है कि जिला चिकित्सालय पहुँचने वाले मरीज़ों की स्थिति सुधरने की बजाय यहाँ और भी ज्यादा बढ़ जाती है। देखने वाली बात यह भी है कि यही नर्सें शहरी मरीज़ या उनके परिजनों के सामने गिड़गिड़ाती हुईं सी नज़र आतीं हैं। कई शहरी मरीज़ों को तो उपचार के दौरान ही मदिरा सेवन की अनुमति तक मौखिक रूप से दे दी जाती है जिसके चलते वार्ड में शराब की दुर्गंध भी आने लगती है।

इस तरह की अव्यवस्थाओं के चलते जब कभी किसी मरीज़ या उसके परिजनों के द्वारा आपत्ति जाहिर की जाती है तो उन्हें अनावश्यक रूप से रेफर करवाने की धमकी तक वहाँ मौजूद स्टाफ के द्वारा दे दी जाती है। जिला चिकित्सालय प्रबंधन को चाहिये कि वह तैनात किये जा रहे स्टाफ को सख्त रूप से हिदायत दे कि मरीज़ वैसे ही परेशान अवस्था में चिकित्सालय पहुँचता है इसलिये स्टाफ के द्वारा इस बात का ध्यान रखा जाये कि उसे अन्य तरीकों से और भी परेशान न किया जाये।

अविनाश गायकवाड़