हरियाणा तमतमाया जल वितरण विवाद पर

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्‍ली (साई)। हरियाणा सरकार ने दावा किया है दिल्ली उच्च न्यायालय के पास यह अधिकार नहीं है कि वह यमुना नदी के चल बंटवारे को लेकर दिल्ली के साथ चल रहे विवाद पर कोई फैसला करे। हरियाणा ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर कोई भी फैसला करने के लिए अपर रिवर यमुना बोर्डउचित निकाय है।

हरियाणा ने उच्च न्यायालय से क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर प्राथमिकताके आधार पर फैसला लेने का अनुरोध किया है। हरियाणा ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय इस मामले में आगे बढ़ने से पहले क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर फैसला करने के अपने कर्तव्य का पालन करने में नाकाम रहा है।

हरियाणा ने दिल्ली उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यामूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष दायर अपने जवाब में अदालत द्वारा नियुक्त समिति के निष्कर्षों पर भी ऐतराज जताया। समिति का गठन इस बात के निरीक्षण के लिए किया गया था कि दिल्ली के लिए पानी ले जाने वाली नहरों में मेड़ें बनी हुई हैं अथवा नहीं।

हरियाणा सरकार ने अदालत से समिति की रिपोर्ट को खारिज करने का आग्रह किया है जिसमें कहा गया है कि यमुना नदी के ताल में बड़े पैमाने पर खनन चल रहा है और हरियाणा सरकार ने गतिविधि के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। समिति ने यह भी कहा है कि खनन गतिविधि न सिर्फ जल प्रवाह में बाधा डाल रही है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण का कारण भी बन रही है।

हरियाणा का कहना है कि रिपोर्ट सिर्फ एक बार निरीक्षण कर दाखिल की गई है और इसमें उससे सलाह मशविरा नहीं किया गया। उच्च न्यायालय ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के आवेदन पर समिति का गठन किया था। बोर्ड ने आवेदन में दावा किया गया है कि दिल्ली को जलापूर्ति करने वाली नहरों में मेड़ें बनाई गई हैं और इससे राष्ट्रीय राजधानी की जल आवश्यकताएं प्रभावित हो रही हैं।