खतरे के साये में दिख रहा एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध!

 

 

खतरा मण्डरा रहा भीमगढ़ बांध पर, अनेक तकीनीकि खामियां फिर भी अधिकारी मौन!

(फैयाज खान)

सिवनी (साई)। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.सुश्री विमला वर्मा के द्वारा जिले को दी गयी अनुपम सौगात का रख रखाव उचित तरीके से न किये जाने के कारण यह बदहाली की ओर अग्रसर होता दिखायी दे रहा है। जिले के भीमगढ़ बांध में सुरक्षा साधनों का अभाव अब साफ – साफ दिखने लगा है।

सिंचाई विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भीमगढ़ बांध का जल भराव क्षेत्र दो हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा है। इस बांध में जल भराव का प्रमुख स्त्रोत बैनगंगा नदी है। इसके अलावा छिंदवाड़ा जिले से आने वाली ठेल नदी का पानी भी भीमगढ़ बांध को पानी की आपूर्ति करता है।

सूत्रों ने बताया कि कि 1995 में जब वर्षा बहुत अधिक मात्रा में हुई थी तब बांध में गेट नहीं लगाये गये थे। उस समय तीन-चार घण्टे की बारिश में 513 मीटर तक पानी बाढ का भर गया था। तकनीकि आधार पर 506 मीटर स्लूस गेट लेबल जहाँ से पानी बाहर नहीं जाता है, पानी निकासी बंद हो जाती है। 519.38 मीटर एफ.टी.एल. यह पानी सिंचाई के काम आता है। 521.7 मीटर जहाँ तक बाढ़ का पानी आता है, 523 मीटर टी.व्ही.एल. यह बांध की अंतिम ऊँचाई है।

इसके साथ ही सूत्रों ने आगे बताया कि बांध की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए इसमें 21 फिल्टर बनाये गये हैं। पानी की शक्ति या पानी का दबाव जब मिट्टी पर पड़ता है तो इन फिल्टरों से पानी रिसने लगता है और बांध सुरक्षित बना रहता है। ये फिल्टर आज किस स्थिति में हैं, यह देखने की फुर्सत किसी को नहीं है। कागजों पर इनका निरीक्षण तो समय – समय पर किया जाता है पर वास्तव में इनका निरीक्षण शायद किया ही नहीं जाता है।

सूत्रों ने आगे बताया कि स्टॉप लॉक गेट यहाँ लगाये जाने चाहिये थे। अचानक भरे बांध में मुख्य गेट में कोई खराबी आ जाये तो स्टॉप लॉक गेट बंद करके मुख्य गेट सुधारा जाता है। इन गेट को बांध में क्यों नहीं लगाया गया है, इस बारे में विभाग के द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है।

इसी तरह सूत्रों ने बताया कि बांध में पानी का रिसाव जिस असुरक्षित तरीके से हो रहा है उसे देखकर लग रहा है कि एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध की सुरक्षा की फिक्र किसी को भी नहीं है। बांध में इन रिसाव वाले स्थलों पर अनेक पेड़ पौधे भी ऊग आये हैं, जिनके चलते बांध के उन हिस्सों को पेड़ की जड़ें खोखला भी कर रही होंगी।

सूत्रों का कहना था कि गर्मी के मौसम में जब बांध में पानी काफी कम होता है तब इस तरह की विसंगतियों को देखकर बांध के रख रखाव की दिशा में अधिकारियों के द्वारा पहल की जाना चाहिये। विडंबना ही कही जायेगी कि बांध के रख रखाव को अधिकारियों के द्वारा कागजों पर ही किया जा रहा है।

इसके साथ ही सूत्रों का कहना है कि भीमगढ़ बांध के जलभराव वाले क्षेत्र में हर साल पानी के साथ बहकर आने वाली अन्य चीजों के कारण सिल्ट जमा हो जाती है। इस सिल्ट को भी गर्मी के मौसम में हटाये जाने का प्रावधान है ताकि जल संग्रहण क्षमता को बढ़ाया जा सके। सूत्रों ने कहा कि भीमगढ़ बांध का रख रखाव देख रहे आला अधिकारियों के द्वारा इस दिशा में भी किसी तरह की पहल नहीं की जाती है, जिससे बांध का जल भराव क्षेत्र लगातार कम होता जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि बांध के आसपास रात्रि के समय भी कोई मौजूद नहीं रहता है। रात में बांध की निगरानी के लिये पर्याप्त मात्रा में अमला और बांध के आसपास प्रकाश व्यवस्था की जानी चाहिये, किन्तु रात के समय भीमगढ़ बांध अंधकार में डूब जाता है।

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