जनता पर टैक्स, फिर भी बदहाल है शहर!

 

 

नागरिक मोर्चा ने ली जनता की सुध

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। नगर पालिका चुनावों की रणभेरी बजने में अब कम समय बचा है, इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी और काँग्रेस के द्वारा सिवनी शहर की सुध नहीं लिया जाना आश्चर्य जनक ही माना जा रहा है। इसी बीच नागरिक मोर्चा ने नागरिकों की सुध लेना आरंभ किया है।

नागरिक मोर्चा द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार नगर पालिका जहाँ नागरिकों को मौलिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में ही सक्षम नज़र नहीं आ रही है वहीं दूसरी ओर नगर पालिका द्वारा संपत्ति कर में भारी बढ़ौत्तरी कर नागरिकों पर अतिरिक्त भार डाल रही। पिछली नागरिक मोर्चे की नगर पालिका द्वारा पूर्व में कम संपत्ति कर होते हुए भी इस नगर पालिका से बेहतर काम किया गया था। आज जो सड़कें बेहतर नज़र आती हैं वो तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष स्व.मूलचंद दुबे के कार्यकाल में ही बनीं। लोग आज भी उस दौर को याद करते हैं और आज के समय को कोसते हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार अगर तुलना की जाये तो पूर्व की तुलना में इस नगर पालिका द्वारा लगभग 04 से पाँच गुना तक टैक्स में वृद्धि की गयी है। जिन मकानों का टैक्स पहले 150 रूपये या 200 रुपये था उनका टैक्स अब लगभग 1000 या 1500 हो गया है। पालिका यहीं नहीं रुकी, इसके अतिरिक्त निर्माण के अलावा खुली हुई भूमि पर भी पालिका द्वारा टैक्स की वसूली की जा रही है। यूँ तो पालिका का शिक्षा से सीधे जुड़ा कोई कार्य नहीं करती पर अतिरिक्त सेस के रूप में पालिका द्वारा नागरिकों पर 03 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी अधिरोपित कर दिया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार पालिका में भ्रष्टाचार का बोल बाला इतना है कि भारी टैक्स वसूली के बावजूद नागरिकों को पहुँचायी जाने वाली मौलिक सुविधाएं ये नगर पालिका मुहैया नही करा पा रही है। जहाँ देखें वहाँ गंदगी का नज़ारा बना हुआ है, बारिश में शहर तालाब बन जाता है। हर जगह नालों और नालियों में मानो बाढ़ आ जाती है क्योंकि बारिश पूर्व नाली और नाले साफ नहीं किये गये, शहर की अधिकांश सड़कंे टूटी पड़ी हुई हैं, जलावर्धन के पानी को आज भी लोग तरस रहे हैं, नलों से गंदा और संक्रमित जल आता है और मॉडल रोड तो भ्रष्टाचार का नया स्मारक बनी नज़र आती है।

विज्ञप्ति के अनुसार शहर में बहुत से नागरिक अभी अनभिज्ञ हैं कि बिना किसी नोटिफिकेशन के कैसे उनका टैक्स बढ़ गया, पर जो नागरिक अपना टैक्स जमा करने पहुँच रहे हैं, उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके संपत्ति टैक्स में भारी बढ़ौत्तरी कैसे हो गयी है। पूछे जाने पर पालिका कर्मचारी कोई स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ नज़र आ रहे हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार यह टैक्स वृद्धि भाजपा और काँग्रेस दोनों के पार्षदों के संज्ञान में रहते हुए की गयी पर वो चुप हैं क्योंकि सबके कुछ न कुछ हित पालिका से जुड़े हैं जो जनता के प्रति जवाबदेही से बड़े हैं। और रही बात विधायक और सांसद की तो वो पार्टी गाईड लाईन से बंधे हैं और पार्टी द्वारा शाषित नगर पालिका पर प्रश्न कैसे उठा सकते हैं।

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