काँग्रेस के नेताओं ने जमाया भोपाल में डेरा

 

 

पद की चाहत में नेताओं ने साधना आरंभ किया अपने-अपने आकाओं को!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। काँग्रेस की सरकार बने आठ माह बीत चुके हैं। विधान सभा सत्र के बाद अब सियासी पुर्नवास की कवायद की खबरें भी आ रही हैं। इसी बीच जिले के सियासी बियावान में एकदम खामोशी पसरी दिख रही है। जिले के नेता या तो भोपाल की दौड़ लगा रहे हैं या अपने – अपने आकाओं को साधने के जतन में लगे हुए हैं।

काँग्रेस के अंदरखाने से छन-छन का बाहर आ रहीं खबरों के अनुसार काँग्रेस सरकार के द्वारा जल्द ही निगम मण्डलों में नियुक्तियां की जाने वाली हैं। इसके लिये जिले के नेताओं की उत्सुकता देखते ही बन रही है। नेताओं के द्वारा अपने – अपने आकाओं के जरिये अपने आप को निगम मण्डल में एडजस्ट करवाने की जुगत लगायी जा रही है।

इसी बीच जिला काँग्रेस कमेटी में फेरबदल की चर्चाएं भी जिले में चल रहीं हैं। जिले में दूसरी पंक्ति के नेताओं के द्वारा जिला काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने की कवायद भी की जा रही है। इसके लिये उनके द्वारा कोई भी मौका हाथ से नहीं निकलने दिया जा रहा है। नेताओं के द्वारा वरिष्ठ नेताओं की चौखटों पर हाज़िरी दी जा रही है।

वहीं, कुछ नेताओं को अपने कद का आभास है, इसलिये वे राजधानी के निगम मण्डलों की दौड़ में शामिल होने की बजाय जबलपुर विकास प्राधिकरण, जिला वक्फ बोर्ड, सहकारी बैंक अध्यक्ष जैसे मलाईदार पदों पर काबिज़ होने के लिये अपने – अपने हिसाब से मोहरे फिट कर रहे हैं।

चर्चाओं के अनुसार पंद्रह साल से सत्ता से बाहर रहने वाले काँग्रेस के अनेक नेता जो पंद्रह बीस साल पहले युवा और ऊर्जावान होने के साथ ही साथ अनेक पदों का संधारण करने के लिये काबिल माने जाते थे वे जिले के एक स्वयंभू कद्दावर नेता के कोप का भाजन बनने से डरते थे और अपनी इच्छाओं को उन्होंने कभी भी किसी भी नेता के समक्ष इसलिये जाहिर नहीं किया था, क्योंकि सभी जानते थे कि कद्दावर नेता के इशारे के बिना उनका उद्धार संभव नहीं है।

चर्चाओं के अनुसार वर्तमान में काँग्रेस का कोई भी नेता प्रदेश या राष्ट्रीय परिदृश्य में इतना शक्तिशाली नहीं है कि उसके चाहने या न चाहने पर कुछ भी हो पाये। इसलिये अब सब अपनी – अपनी पूरी ताकत खुद को स्थापित करने में ही झोंक रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य में कोई भी नेता के द्वारा पूरी ताकत के साथ यह नहीं कहा जा पा रहा है कि वे फलां काम करवा देंगे।

चर्चाओं के अनुसार जिले में कम से कम दो पद मिलने की उम्मीद है। ये पद निगम मण्डल या प्राधिकरण स्तर के हो सकते हैं। इसके अलावा सहकारी बैंक अध्यक्ष और वक्फ बोर्ड के लिये भी नेताओं के द्वारा जमकर लॉबिंग की जा रही है। जिले के आला नेता खुद ही बैंक अध्यक्ष बनना चाह रहे हैं तो अपने समर्थक को वक्फ बोर्ड में बैठाने आतुर दिख रहे हैं।

हाल ही में जिले के अंदर हुए तबादलों को लेकर भी तरह – तरह की चर्चाओं का बाज़ार गर्मा रहा है। लोग अपने – अपने हिसाब से इन तबादलों में लेन देन आदि की चर्चाएं करने से बाज भी नहीं आ रहे हैं। इन तबादलों में कुछ तबादलों को विधायकों के द्वारा निरस्त कराये जाने की चर्चाएं भी चल रहीं हैं।