मौसम आधारित कृषि सलाह

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा सिवनी जिले के किसानों को आने वाले पाँच दिनों में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए सभी सब्जियों, दलहनी फसलांे, मक्का तथा सब्जियों की पौधशाला में जल निकास का उचित प्रबंध करने के साथ ही फसलों में सिचाई न करने की सलाह दी गयी है।

किसानों को धान के खेतों में ज्यादा से ज्यादा पानी रोकने तथा धान की रोपाई आने वाले दिनों में प्राथमिकता के आधार पर करने की सलाह दी गयी है। इसके साथ ही कहा गया है कि रोपाई करते समय ऊपर से 2-3 इंच पत्तियों को काट दें। फसल में कम से कम 2.5 सेंटी मीटर पानी खड़ा रखें। पौध से पौध की दूरी 10 सेंटी मीटर तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेंटी मीटर रखें।

जिन किसानों की पौधशाला खराब हो गयी हो तो वे धान के अंकुरित बीजों की बुवाई सीधे कर सकते है, इसके लिये खेत समतल होना चाहिये, साथ ही धान की कम समय में तैयार होने वाली किस्में जैसे जे आर एच-5, जे आर एच-8 या क्षेत्र विशेष के लिये प्रमाणित किस्मों का बीज लेकर सीधे अंकुरित बीजों की बुवाई कर सकते हैं।

उर्वरकों में 120 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट, हैक्टर की दर से ड़ालें, तथा नील हरित शैवाल का एक पैकेट, एकड़ का प्रयोग करे ताकि मृदा में नत्रजन की मात्रा बढ़ायी जा सके। नत्रजन की एक तिहाई मात्रा (40 किलोग्राम) ही रोपाई के समय प्रयोग करें।

जिन किसानों की मिर्च, बैंगन व अगेती फूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को मद्देनज़र रखते हुए रोपाई मेंड़ों (उथली क्यारियों) पर करें। किसान ध्यान रखें कि खेत में ज्यादा पानी खड़ा न रहें यदि खेत में पानी ज्यादा रह गया तो उसकी निकासी का तुरंत प्रबंध करें।

कद्दूवर्गीय सब्जियों की वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें। उन्नत किस्में : लौकी – पूसा संतुष्टि, पूसा नवीन, पूसा सदेंश, करेला – पूसा विशेष, पूसा – दो मौसमी, तुरई – पूसा चिकनी, पूसा स्नेह; धारीदार तुरई – पूसा नसदार किस्मों की बुवाई मेंड़ों (उथली क्यारियों) पर करें। कद्दूवर्गीय सब्जियों की वर्षाकालीन फसलों में हानिकारक कीटों – बीमारियों की निगरानी करें व बेलों को ऊपर चढ़ाने की व्यवस्था करें ताकि वर्षा से सब्जियों की लताओं को गलने से बचाया जा सके तथा जल निकास का उचित प्रबंध रखें।

कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहें, कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें।

मक्का फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट जो मक्का फसल की पोंगली में दिखायी देता है और ऊपर से पत्तियां कटी हुई और छेद दिखते हैं नियंत्रण के लिये (एमामेक्टिन बैंजोएट 5 प्रतिशत एसजी) का 10 ग्राम दवा प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर और प्रति टंकी में 05 मिलीलीटर सिलिकॉन चिपको मिलाकर मक्का फसल की पोंगली में और पौधों पर मौसम साफ रहने पर छिड़काव करें। कम से कम 150 लीटर तैयार घोल प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें समन्वित प्रयास करें। धान के रोपा में अगर पीलापन, पत्तियों पर धब्बा, ब्लाइट का प्रकोप हो तो रोपा में एक छिड़काव (मेंकोजेब 50 प्रतिशत और कार्बेंडाजिम 25 प्रतिशत) स्प्रिन्ट दवा का 40 ग्राम के साथ बॉयोविटा 50 मिलीलीटर को प्रति 15 लीटर पानी मे घोल कर नर्सरी रोपा में छिड़काव करें।

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