बिना बताए किसानों को बनाया पत्रिका का सदस्य

 

 

 

 

 

हुआ करोड़ों का खेल

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। प्रदेश में अभी तक किसानों के साथ नकली खाद, बीज और फर्जी कर्ज के नाम पर फर्जीवाड़े के मामले अक्सर सामने आते थे, लेकिन अब नए तरह का मामला सामने आया है। इसमें किसानों को बिना बताए कृषक सुरक्षा नामक पत्रिका का सदस्य बनाकर करोड़ों रुपए का गोलमाल हो गया।

किसान को इसके बारे में पता ही नहीं है और उसके कर्ज खाते से राशि काटकर सीधे पत्रिका के प्रकाशक को दे दी गई। अकेले बालाघाट में 12,263 किसानों के नाम एक करोड़ 69 लाख 93 हजार 802 रुपए का भुगतान हुआ। इसको लेकर न तो राज्य सरकार की ओर से कोई नीतिगत निर्णय लिया गया था और न ही अपेक्स बैंक ने जिला बैंक को सिफारिश की।

इतना ही नहीं सदस्यता के साथ पांच लीटर के पैक में एक सुरक्षा गोल्ड लाइम मुफ्त दिया जाना था, जो किसी भी किसान को नहीं दिया गया। सरकार ने कलेक्टर से जांच कराई और इसमें फर्जीवाड़ा प्रमाणित पाया गया। इसके आधार पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, बालाघाट के तत्कालीन सीईओ पीएस धनवाल को निलंबित कर दिया गया और पूरे प्रदेश में जांच कराई जा रही है। नवदुनिया” के पास बालाघाट कलेक्टर की जांच रिपोर्ट मौजूद है।

गुपचुप चल रहा था, ध्यानाकर्षण से हुआ खुलासा

यह पूरा खेल गुपचुप चल रहा था। कृषक सुरक्षा पत्रिका के प्रकाशक ने 14 सितंबर 2018 को बालाघाट सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र लिखकर समितियों के जरिए किसानों को इसका सदस्य बनाने का ऑफर दिया। इसमें बताया कि तीन साल की सदस्यता का शुल्क दो हजार 550 रुपए रखा गया है। समितियों को कुल सदस्यता का तीन फीसदी हिस्सा बतौर प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को एक प्रतिशत प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

पत्र में लिखा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कृषि के प्रति जागरुकता को देखते हुए जरूरी हो गया है कि किसानों को पत्रिका की जानकारी पहुंचे। घोषित तौर पर ऑफर आकर्षक था, इसलिए बैंक ने इसे हाथों-हाथ लिया। नियमानुसार पहले किसानों को इसकी जानकारी दी जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बालाघाट जिले से विधायक रामकिशोर कावरे ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण लगाया। इसका जवाब देने जब पड़ताल की गई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

किसानों को सदस्य बनाने के बैंक स्तर से थे निर्देश

बालाघाट कलेक्टर की जांच में खुलासा हुआ कि जिला बैंक के स्तर से समितियों को किसानों को पत्रिका का सदस्य बनाने के निर्देश मिले थे। हट्टा समिति के तत्कालीन शाखा प्रभारी ने जांच दल को बताया कि जिला बैंक से शाखा और समिति प्रबंधक को किसानों को पत्रिका का सदस्य बनाने के निर्देश मिले थे। किसानों के अधूरे सहमति पत्र डाक क से भेजे गए। इसमें सदस्यता का शुल्क किसानों के परमिट पर समायोजन कर पत्रिका को भुगतान करने के निर्देश थे। इसके बदले में किसानों को पांच लीटर कृषक सुरक्षा गोल्ड जाइम मुफ्त दिया जाना था।

सभी बैंक से कराएंगे जांच: डॉ.अग्रवाल

आयुक्त सहकारिता डॉ.एमके अग्रवाल ने बताया कि अभी बालाघाट में मामला सामने आया है। कलेक्टर से विस्तृत जांच करा रहे हैं। अपेक्स बैंक को कहा गया है कि सभी जिला बैंकों के माध्यम से जांच कराए

अधिकारियों पर गिरेगी गाज

सूत्रों का कहना है कि मामले में कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। शासन ने कलेक्टर को पूरे मामले की तहकीकात करने के निर्देश दिए हैं। अभी दो सहकारी समितियों में मामला प्रमाणित हुआ है। इस पर कार्रवाई करते हुए कृषि साख सहकारी समिति बोदा के संस्था प्रबंधक और कृषि साख सहकारी समिति हट्टा के संस्था प्रबंधक को निलंबित कर दिया है। बाकी 124 समितियों की जांच भी कराई जा रही है। इसके लिए टीमें बनाई गई हैं।

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