टाईगर स्टेट बना एमपी

 

 

जानें बाघों से जुड़ीं कुछ दिलचस्प बातें

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। बाघ के मामले में मध्य प्रदेश की बादशाहत बरकरार है। मध्य प्रदेश को एक बार फिर टाईगर स्टेट का दर्जा मिल गया है। आईये आज आपको बाघ से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं।

मरने के बाद भी रह सकता है खड़ा : जानकारों का कहना है कि बाघ की ताकत का अंदाज़ा अब तक कोई नहीं लगा सका है। इसकी ताकत का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि, इसके पैर इतने मज़बूत होते हैं कि मरने के बाद भी बाघ इन पर खड़ा रह सकता है। अपने मज़बूत पैरों से बाघ को शिकार करने में मदद मिलती है, जिससे वो बड़े से बड़े जानवर का शिकार करने में सक्षम होता है।

आँखों में देखकर बचायी जा सकती है जान : ऐसा माना जाता है कि, बाघ से सामना होने की स्थिति में अगर आप बाघ की आँखों में देखते हैं, तो बाघ आप पर हमला करने से पहले सोचेगा। इस बात के भी काफी चांसेस हैं कि, वो आप पर हमला करने का इरादा ही बदल दे।

शुरुआत की एक हफ्ते बाघ देख नहीं सकते : क्या आपको पता है कि, जन्म के बाद लगभग एक सप्ताह तक, बाघ अपनी आँखों से कुछ भी नहीं देख सकते, क्योंकि इस दौरान वो लगभग अंधे रहते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, आधे से ज्यादा बाघ युवा अवस्था से पहले ही कई कारणों के चलते मर जाते हैं।

04 से 05 मीटर तक लगा सकता है छलांग : जानकार बातते हैं कि एक व्यस्क बाघ अपने दो पैरों के बल पर खड़े होने पर 9 फीट लंबाई तक का होता है। चारों पैरों पर खड़े होकर भी ये लगभग 05 फीट ऊँचे होते हैं। इसके अलावा, बाघ पाँच मीटर तक की ऊँचाई पर एक छलांग में चढ़ने और छः मीटर तक की चौड़ाई भी आराम से फांदने में सक्षम होता है।

300 किलो तक का होता है बाघ : एक व्यस्क बाघ का वजन 300 किलो तक होता है, जबकि वो अपने से पाँच गुना वज़नी जानवर का भी आसानी से शिकार कर सकता है। वहीं, क्या आपको पता है कि बाघ का दिमाग 300 ग्राम तक का होता है।

होता है शानदार तैराक : बाघ शानदार तैराक होते हैं। जी हाँ, बाघ 06 किलोमीटर तक की दूरी पूरी रफ्तार के साथ तैरकर आराम से पार कर सकता है। मतलब, पानी में भी वो अपने शिकार को दबोचने में सक्षम होता है।

06 उप जाति हैं बाघ की : एक समय धरती पर बाघ की 09 उपजाति पायी जाती थी, लेकिन आज ये विलुप्त होते – होते सिर्फ छः रह गयी हैं। पिछले 80 सालों में बाघों की तीन उप जातियां पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं।

बाकी उप जाति के अंतिम 15 वर्ष : जानकारों की मानें तो, जिस हिसाब से दुनियाभर की सरकारों की बेगौरी और बाघ के अवैध शिकार के चलते इनकी बची हुई 06 उप जातियां भी अगले 15 सालों में विलुप्त हो सकती हैं।

दांतों में होती है इनकी मुख्य जान : बाघों के दांत अति महत्वपूर्ण होते हैं। यहाँ तक की बाघों के श्वदंत या कैनाइन, जिससे वह अपने शिकार का चीर-फाड़ करते हैं, अगर ये दांत टूट जायंे तो बाघ की जिंदगी तक जा सकती है।

दूर तक जाती है गरज : आमतौर पर एक व्यस्क बाघ की दहाड़ सुनसान जगह पर लगभग 02 किलोमीटर तक की दूरी तक सुनायी देती है। इसे अगर कोई व्यक्ति करीब से सुन ले तो उसकी गरज से व्यक्ति की जान भी जा सकती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि, कई छोटे जानवर तो सिर्फ बाघ की गरजती हुई आवाज़ सुनकर ही दम तोड़ देते हैं।

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