नीलामी की राह देखता शॉपिंग कॉम्प्लेक्स

 

 

जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से अघोषित मूत्रालय में हुआ तब्दील

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। चार सालों से एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनकर तैयार है पर इसे आरंभ नहीं करवाया जा पा रहा है। जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते कान्हीवाड़ा में बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का उपयोग लोग लघुशंका करने के लिये करते नज़र आते हैं। शाम ढलते ही यह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स मयखाने में तब्दील हो जाता है।

कान्हीवाड़ा के लोगों का कहना है कि सिवनी मण्डला रोड पर कान्हीवाड़ा एक ऐसा गाँव है जहाँ शासन, प्रशासन के द्वारा सौगातें तो बहुतायत में दी गयी हैं पर जन प्रतिनिधियों की कथित उदासीनता के चलते इन सौगातों का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों ने अपनी व्यथा समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से साझा करते हुए बताया कि कान्हीवाड़ा में अतिक्रमण चारों ओर पसरा हुआ है। हर बार अतिक्रमण हटाये जाने के लिये लिये मुनादी की जाती है पर इसके बाद मामला ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार गाँव में चार साल पहले एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण करवाया गया था। इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में दुकानों को नीलाम किया जाना था, पर ये दुकानें नीलाम क्यों नहीं की जा रही हैं इस बारे में शायद ही कोई अधिकृत तौर पर जानता हो।

ग्रामीणों ने बताया कि जन प्रतिनिधियों की कथित उदासीनता के चलते यह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पिछले डेढ़ दो सालों से अघोषित मूत्रालय में तब्दील हो गया है। इसके अलावा शाम ढलते ही यहाँ से धुंए के छोटे – छोटे छल्ले निकलते दिखते हैं और बीच बीच में सोडे की डकारें भी सुनायी दे जाती हैं।

इधर, जनपद पंचायत के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में नीलामी के लिये दो बार प्रयास किये गये किन्तु दुकानों की धरोहर राशि 06 लाख रूपये एवं मासिक किराया 2500 रूपये होने के कारण किसी ने भी बोली में हिस्सा नहीं लिया।

सूत्रों का कहना था कि इस मामले में जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में प्रस्ताव पारित कर अनुविभागीय अधिकारी सिवनी को पत्र लिखकर दुकानों की धरोहर राशि एवं मासिक किराये को कम करने की बात कही गयी थी, किन्तु तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा दोनों ही बातों को कम करने से दो टूक शब्दों में इंकार कर दिया गया था।

सूत्रों का कहना है कि चार सालों से उजाड़ पड़े इस कॉम्प्लेक्स की धरोहर राशि और किराये को अगर कम कर दिया जाता तो चार सालों में जनपद पंचायत को इससे काफी आय हो जाती, पर अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण यह कॉम्प्लेक्स किसी के काम का नहीं रह गया है।