चिकित्सकों की लेट लतीफी से जिला प्रशासन अनभिज्ञ!

 

बारिश के इन दिनों में बीमारियों ने तेजी से पैर पसारना आरंभ कर दिया है। किसी बीमारी से ग्रसित कोई मरीज़ जब तय समय पर जिला चिकित्सालय पहुँचता है तो उसे चिकित्सक के पहुँचने के लिये काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है।

जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के मिलने का समय दर्शाया तो गया है लेकिन यह शायद वहाँ के चिकित्सकों की जानकारी में ही नहीं है कि उन्हें कब मरीज़ों के परीक्षण के लिये जिला चिकित्सालय पहुँचना है और शायद इसीलिये इस सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के मिलने का कोई समय निर्धारित नहीं लगता है। अलबत्ता मरीज़ तो तय समय पर ही पहुँच जाते हैं।

बार-बार समाचार माध्यमों में सरकारी चिकित्सकों की लेट लतीफी की खबरें आने के बाद भी जिला प्रशासन इस बात से अनभिज्ञ बना हुआ है और उसके द्वारा इस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की जा रही है जिससे मरीज़ों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। सिवनी का जिला प्रशासन जिला चिकित्सालय में अधिकांश चिकित्सक वक्त पर तो पहुँचते नहीं हैं और दूसरी तरफ वक्त पूरा होने के पहले वे अपनी रवानगी भी डाल देते हैं। जिला चिकित्सालय के इसी तरह के प्रबंधन से मुझे शिकायत है।

सिवनी के सरकारी अस्पताल में अधिकांश चिकित्सकों का रवैया बेहद ही लापरवाह भरा माना जा सकता है। यहाँ चिकित्सक समय पर तो पहुँचते नहीं हैं और जब देर से आते हैं तब तक मरीजों की लाईन बेहद लंबी हो चुकी होती है। देखने वाली बात यह है कि भारी तादाद में उपस्थित मरीजों को यहाँ पदस्थ चिकित्सक अत्यंत अल्प समय में ही निपटा देते हैं। आश्चर्य जनक बात यह है कि निजि क्लिनिक्स में चिकित्सक सदैव ही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं।

इस तरह यह साफ-साफ कहा जा सकता है कि जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के द्वारा मरीजों का परीक्षण उचित तरीके से किये जाने की बजाय उन्हें बेगार की तरह ही टाला जाता है। चिकित्सकों को यह सोचना चाहिये कि दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज बहुत आस लेकर जिला चिकित्सालय में पदस्थ चिकित्सक के पास पहुँचते हैं कि गंभीरता के साथ उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जायेगा जिसका लाभ उन्हें मिलेगा। चिकित्सकों को मानव धर्म निभाने के लिये भी यदि अलग से आगाह करना पड़ेगा तो उनकी विश्वसनीयता पर संदेह उठना स्वाभाविक ही है।

हबीब कुरैशी