दुर्दशा पर आँसू बहाता भीमगढ़ बांध

 

 

(शरद खरे)

एॅशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध का गौरव संजय सरोवर परियोजना के भीमगढ़ बांध को प्राप्त है। यह सिवनी के लिये गौरव की बात भी है। भीमगढ़ बांध का उपयोग अब सैलानियों को आकर्षित करने के लिये किया जाने वाला है। अपने अंदर विपुल जलराशि संग्रहित करने वाले इस जलाशय की सुध, सालों से किसी के द्वारा नहीं लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण ही माना जायेगा। हाल ही में जिलाधिकारी प्रवीण सिंह के द्वारा भीमगढ़ की सुध ली गयी है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिये।

भीमगढ़ बांध में लगभग साढ़े तीन दशकों से निरंतर पानी एकत्र हो रहा है। इसका उपयोग पेयजल और सिंचाई के रूप में हो रहा है। इस पानी का उपयोग सिवनी के साथ ही साथ बालाघाट एवं अन्य जिलों के लोग भी करते हैं। बारिश के मौसम में इसके अंदर हर साल न जाने कितने लकड़ी के डूंठ, गंदगी, रेत, पत्थर आदि बहकर समाते हैं। इसके चलते इसकी तलहटी में सिल्ट जमा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस सिल्ट या गाद को अगर निरंतर साफ नहीं किया गया तो तलहटी उथली होती जायेगी और जल भराव क्षमता शनैः शनैः कम ही होती चली जायेगी।

भीमगढ़ बांध का स्वरूप गर्मियों में अलग होता है। इसके जल भराव क्षेत्र (केचमेंट एरिया) से पानी खाली हो जाता है। दरअसल, सिंचाई विभाग के द्वारा ही इसके रख रखाव में महज़ रस्म अदायगी का काम ही किया जाता है। जल संसाधन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन हैं। इसके जल भराव क्षेत्र को अगर निरंतर साफ किया जाकर गहरा किया जाता तो इसकी जल संग्रहण क्षमता में इज़ाफा किया जा सकता था, विडंबना ही कही जायेगी कि इस ओर ध्यान देना विभाग ने मुनासिब ही नहीं समझा है।

भीमगढ़ बांध में स्टाप लॉक गेट और पानी निकासी को नियंत्रित करने फिल्टर्स की क्या स्थिति है, इस बारे में सिंचाई विभाग पूरी तरह मौन ही नज़र आ रहा है। भीमगढ़ बांध का वाटर लेबल ऊपरी सतह पर तो सालों पहले बनाये गये स्केल के हिसाब से ठीक माना जा सकता है पर क्या वाकई में आज भी भीमगढ़ बांध की तलहटी उतनी ही गहरायी पर है जितनी कि पहले थी? क्या इसकी तलहटी में सिल्ट जमा नहीं हुई है? इस तरह के यक्ष प्रश्नों से शायद किसी को लेना-देना नहीं है। गर्मी के मौसम में भी अवैध रूप से लगीं मोटर्स से भी इसका पेट खाली किया जाता है।

बारिश के दिनों में भीमगढ़ बांध के अंदर विपुल जलराशि भरी होती है। इस बांध की सुरक्षा के माकूल इंतज़ामात भी नहीं दिखते हैं। यहाँ रात के स्याह अंधकार में प्रकाश की भी पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। यहाँ बांध के मुहाने पर लगीं लाईट्स भी बंद ही पड़ी रहती हैं। रात को अगर यहाँ कोई गलत इरादों से पहुँचना चाहे तो आसानी से पहुँच सकता है।

भीमगढ़ बांध के पास वाली पहाड़ी पर बना रेस्ट हाउस भी जर्जर अवस्था को ही पा चुका है। इसके रख रखाव की चिंता भी किसी को नहीं है। इस रेस्ट हाऊस को संवारा जाये तो यहाँ पर्यटक भी आकर्षित हो सकते हैं। प्रदेश में वाटर स्पोटर््स और मिनी क्रूज आदि की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। इस फेहरिस्त में भीमगढ़ बांध को भी शामिल किया जा सकता है।

सांसद-विधायकों ने भी इस दिशा में ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा है। संवेदनशील जिला प्रवीण सिंह के द्वारा बांध का निरीक्षण किया गया है। उनके द्वारा इस बांध को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का विचार किया गया है। देखा जाये तो भीमगढ़ बांध जिले को पर्यटन के नक्शे पर पेंच नेशनल पार्क की तरह ही स्थान भी दिला सकता है, बशर्ते इसके लिये ईमानदारी से प्रयास किये जायें।