समाप्त होते जा रहे हैं खेल मैदान!

 

 

सिवनी में खेल मैदान का दुरूपयोग किसी से छुपा नहीं रह गया है। शासन प्रशासन के द्वारा इस संबंध में बार-बार दिशा निर्देश तो जारी किये जाते हैं लेकिन उन पर अमल करवाने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी सिवनी जिले को नसीब न हो पाने के कारण यहाँ खेल मैदानों की स्थिति अपेक्षाकृत अत्यंत दयनीय हो गयी है।

पूर्व में सिवनी में स्टेडियम तो नहीं थे लेकिन खिलाड़ियों के लिये अभ्यास अथवा प्रतियोगिताएं आयोजित करवाने के लिये जगह की कोई कमी नहीं थी। शायद यही वजह भी है कि उन दिनों सिवनी का नाम हॉकी, क्रिकेट जैसे खेलों में विख्यात था और आसपास के अन्य जिलों की टीमें सिवनी से मुकाबला करने के लिये आतुर रहा करतीं थीं।

हॉकी में तो जैसे सिवनी जिले के नाम की तूती ही बोला करती थी। विभिन्न मैदान सिवनी में हॉकी के अभ्यास के लिये हुआ करते थे। सिवनी के क्लब भी एक से बढ़कर एक थे। शहर के मध्य कोतवाली के सामने छोटी पुलिस लाईन स्थित मैदान जिसे उर्दू स्कूल ग्राउण्ड भी कहा जाता है, यहाँ पर भी हॉकी का अभ्यास किया जाता था। हॉकी के साथ ही साथ इस मैदान पर क्रिकेट भी खेला जाता था।

शहर के बीच स्थित इस मैदान का आकार विशालकाय हुआ करता था लेकिन संबंधितों की दूरंदेशी की कमी की वजह से आज इस मैदान को अत्यंत छोटा कर दिया गया है। एक प्रकार से कहा जाये तो आने वाले समय में यह मैदान आउट डोर खेलों के लिये न रह जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा। इसके पीछे वजह यही है कि यहाँ पदस्थ होने वाले अधिकारियों को जिले से वास्तव में कोई सरोकार नहीं रहता है और वे सिर्फ नौकरी करके पगार पाने के लिये यहाँ आते हैं। ऐसे अधिकारियों की अनदेखी के चलते उर्दू स्कूल मैदान ही नहीं बल्कि अन्य मैदान भी धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।

मैदानों का उपयोग इमारत खड़ी करने के लिये किया जाने लगा है। यदि मैदान के आसपास इमारत बनाना इतना ही आवश्यक है तो किसी एक स्थान पर भव्य भवन बनाया जाना ज्यादा अच्छा होता बजाय इसके कि संपूर्ण मैदान को ही धीरे-धीरे समाप्त कर दिया जाये। खेल मैदान को समाप्त करने का सबसे अच्छा उदाहरण जिला चिकित्सालय है जहाँ के मैदान को पहले होमगार्ड ग्राउण्ड कहा जाता था।

इस होमगार्ड मैदान पर खिलाड़ी अभ्यास ही नहीं बल्कि प्रतियोगिताएं भी खेला करते थे। एक समय ऐसा आया जब इस मैदान पर पहले तो खिलाड़ियों का खेला जाना बंद करवा दिया गया और फिर कब इस मैदान के आसपास इमारतें खड़ी करके इस मैदान के अस्तित्व को मिटाने के प्रयास आरंभ हो गये, इसका किसी को पता ही नहीं चल सका।

इस स्तंभ के माध्यम से मैं यही कहना चाहता हूँ कि अब भविष्य में शहरी क्षेत्र में खेल मैदान की उपलब्धता अत्यंत दुष्कर कार्य दिख रही है। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि जागरूक लोग अपनी जागरूकता सदैव दिखायें तभी अपेक्षाकृत नतीजें सिवनी को मिल सकते हैं। अभी होता यह है कि समय विशेष पर कुछ लोग सामने आकर अपनी झूठी जागरूकता का प्रचार प्रसार करके वाहवाही लूटने का प्रयास करते हैं और फिर कहाँ चले जाते हैं यह किसी को पता नहीं चलता है। खेल मैदान को लेकर सतत जागरूकता की आवश्यकता है अन्यथा शहर के अंदर खेल के लिये सिर्फ मोबाईल ही रह जायेंगे।

इंद्र नारायण ठाकुर