छोकरे की ख्वाहिश, छोकरी का वास्ते बंदिश

 

 

(अवधेश व्यास)

देखे क्या भाय, अबी छोकरी लोक घर से एकदम रॉपचिक स्टाइल में बाहेर निकल रएली हैं। कोई बोले तो, अबी मां रूठे या पापा बोल के घर से निकल के भाग रएली है अपुन के दिल की दौलत का वास्ते, तो कोई भागने कू घर से निकल रएली है अपुन के जुनून से निस्बत का वास्ते, तो कोई भाग रएली है अपुन के मुलुक की अहमियत का वास्ते। कोई घर से भाग के खोल रएली है जिंदगी की मचमच की किताब, तो कोई ट्रैक पे उतार के अपुन के ख्वाब, स्पीड से टाइम कू पछाड़ के जीत रएली है खिताब।

पन क्या है ना भाय, बोले तो ये तो अबी अबी के दो चार नाम हैं, बाकी जो हैं, वो गुमनाम हैं, नाकाम हैं, हालात के गुलाम हैं। बोले तो ये साक्षी है, वो हिमा दास है, वो दुती चंद है, पन अबी बी भोत छोकरी लोक का वास्ते आगू का रास्ता बंद है। अपुन के इदर तो नजरिये की करतूत है, माथे पे छोकरे का भूत है, बोले तो छोकरा का वास्ते सुट, बोले तो छूट है और छोकरी लोक का नाम पे डिस्प्यूट है। छोकरे की ख्वाहिश है, छोकरा लाइफ पे वार्निश है, पन छोकरी खलिश है, छोकरी का वास्ते बंदिश है।

अबी क्या बोलेंगा बावा, बोले तो जात बिरादरी ने तो हर टाइम किया ईच है गुमराह, पन अबी तो हालात ये है भाय, बोले तो इंसानियत की उड़ती है अफवाह और हैवानियत खबर बन के करती है गुनाह। छोटी छोटी मासूम बच्चियां तलक तपासती हैं पनाह, पन दरिंदगी कर देती है तबाह, मिलता नहीं है कोई गवाह। किदर मोहब्बत ट्रोल होती है, किदर छोकरी सिरिप गोश्त का भूगोल होती है, बीमार मगज पे शराफत के दिखावे की खोल होती है। फिर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसा मुहिम बी बोले तो रागपट्टी का ईच झोल होती है।

इदर छोकरी लोक ब्लैक आउट का हालत में भाग भाग कर बदल रएली हैं जिंदगी का लेआउट, उदर छोकरा लोक या तो स्टंप्ड हो रएले हैं, नई तो हो रएले हैं रन आउट। उदर छोकरी लोक जीत रएली हैं मैडल पे मैडल, पन इदर भाई लोक कू ये बात का गम है, बोले तो हार गएले क्रिकेट के वर्ल्ड कप का बैटल। पन अपुन क्या बोलता है भाय, बोले तो अबी क्या करने का है वर्ल्ड कप का! पएला से दो दो रखेले हैं। याद में आज बी ताजा जीत के वो दिन सजीले नशीले हैं।

पन ये क्या, ये बार तो रिजल्ट ईच हटेले हैं, बोले तो मैच टाई है, सुपर ओवर टाई है, बोले तो दोनों ईच टीम ढाई ढाई है, तो कायकू घाई है! ऐसा थ्रिलर में तो दोनों ईच टीम कू बोल देने का था विनर, पन क्रिकेट का मक्का में बी चौका का चला तुक्का, बोले तो दुनियादारी का यईच पॉइंट हुआ पक्का, बोले तो जो मौका देखते ईच मारेंगा चौका, वोईच बनेंगा अक्खे वर्ल्ड का आका और लूटेंगा इनाम का खोका का खोका। मेहनत करके भाग भाग के एक-एक दो-दो रन बनाने वाला खाता ईच रहेंगा धोका, बोले तो रन आउट हो के करेंगा फाका।

ये बार वर्ल्ड कप में अपुन की फिलम बी रन आउट पे ईच हुई थी खतम। पन, अपुन के मुलुक में तो क्या है ना भाय, बोले तो रन आउट का आइटम हर टाइम एकदम गरम है। जिंदगी का मैच में मौसम ईच लगा देता है फील्डिंग, बोले तो बरसात होए तो किदर बाढ़ में डूब के मरती है पब्लिक, तो किदर गिरती है बिल्डिंग और कमती हो जाती है जिंदगी की रेटिंग। कबी सरदी की लहर के और कबी गरमी में लू के जौहर और सूखे के कहर के सीधे थ्रो से रन आउट हो जाते हैं लोक।

अपुन का यार सलीम पानी बोलता है, भिड़, कीड़े मत मार, बोले तो दिमाग का दही मत कर। वो देड़ शाणे लोक बोलते हैं, बोले तो सोना बी जबी जास्ती हो जाता है ना, तो लोखंड की तराजू पे ईच तुलता है। अबी अपुन के इदर पब्लिक के मगज में बैट बॉल का भोत जास्ती बड़ गएला है कोलेस्ट्रॉल, तो अबी क्रिकेट का उखड़ने देने का विकेट, बोले तो अपुन कू कप नई, अबी मांगता है बशी, बोले तो पलेट, कायकू बोले तो अबी सबका भरना मांगता है पाकिट और पेट, खुलना मांगता है खुशाली का गेट और तोड़ना मांगता है अपुन की बच्ची लोक के दायरे का ब्रैकेट, कायकू बोले तो उनकू देना मांगता है उनका आसमान और उनकू बनाना मांगता है उनका ईच, बोले तो सेल्फ पाइलेट, क्या!

 

(साई फीचर्स)